मेडिकल दुकानों में बैन के बाद भी कोडीनयुक्त दवा का नशे के लिए हो रहा जमकर इस्तेमाल.
जगदलपुर। सब इससे वाकिब हैं की शहरों से लेकर ग्रामीण तक कोरेक्स का धंधा जोरों से हैं। प्रशासन द्वारा इसपर पाबन्दी लगाने के बाद अब बाजार में नए नशे का व्यापार शुरू हो चुका है। ज्यादातर युवा इस मेडिकल नशे की गिरप्त में आते जा रहे हैं। हैरानी इसबात की है कि सम्बंधित विभाग अभी तक खामोश बैठा है। कोडीनयुक्त नशीली दवाइयों की खरीदी बिक्री के कड़े नियम की झंझट के चलते अब मेडिकल दुकानों के संचालक भी इन्हें बेचने से बच रहे हैं।
इसके बावजूद शहर के कचरे कूढ़े व सार्वजनिक स्थलों पर इन दवाइयों की खाली बोतलें भारी मात्रा में दिखाई दे रही हैं जो इशारा कर रही है कि इस कोडीनयुक्त नशीली दवाइयों का शहर में नशे के लिए जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। इधर न तो पुलिस न ही खाद्य व औषधी प्रशासन विभाग इस ओर सख्त कार्रवाई कर रहा है। इक्का दुक्का लोगों को ही पकडकऱ पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है।
सर्दी खांसी रोकने में इस्तेमाल होने वाली ये दवा बहुत जरूरी होने पर ही दी जा सकती है और मेडिकल स्टोर्स में डाक्टर की पर्ची के बगैर नहीं मिलती। इसके ज्यादा इस्तेमाल से व्यक्ति सोचने समझने की शक्ति तक खो सकता है, दूसरे तरफ संबंधित विभाग को इसकी भनक तक नहीं है। कोडीनयुक्त दवाइयों के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाले खतरे से अंजान शहर के युवा इस नशा का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं।
रविवार की सुबह नए बस स्टैंड के काम्पलेक्स में कोडिनयुक्त दवाइयों की खाली बोतलें बड़े पैमाने पर मिलीं। इसके पूर्व शहर की कई जगहों पर इन दवाइयों की बोतलें पाई जाती रही हैं। इससे स्पष्ट है कि शहर में ये दवाइयां बेरोकटोक के पहुंच रही हैं। शहर के युवा बड़ी संख्या में इस नशीली दवा की गिरफ्त में हैं। ये इस दवा को खरीदने उसकी वास्तविक कीमत से कहीं ज्यादा उसके विक्रेताओं व बिचौलियों को दे रहे हैं। शौकीन उसे किसी भी कीमत पर खरीदने को तैयार रहते हैं।
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