
बस्तर . बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव को हाई कोर्ट ने वृंदावन कॉलोनी और उसके आसपास की 38 एकड़ की जमीन का असल हकदार माना है। हिंदू उत्तराधिकारी अधिनियम के तहत आए इस फैसले से करीब 750 परिवार प्रभावित हो रहे हैं। 1978 के बाद जिन लोगों ने इस इलाके में रानी वेदवती और उनके परिवार से जमीन खरीदी थी, उनकी बिक्री कोर्ट ने निरस्त कर दी है।
हाईकोर्ट ने बस्तर के वर्तमान राजा को विरासत में मिली संपत्ति का स्वाभाविक हकदार माना है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा व जस्टिस विमला सिंह कपूर की युगलपीठ ने विरासत में मिली संपत्ति पर वर्तमान राजा को संपत्ति का स्वाभाविक व परंपरानुसार हकदार मानते हुए पूर्व के बंटवारे को अपास्त कर दिया है। साथ ही बेची गई सभी संपत्ति को वापस लेने का निर्देश दिया है।
यह खबर जैसे ही जमीन पर काबिज परिवारों के बीच पहुंची उनमें हड़कंप मच गया। सभी एक दूसरे से हाई कोर्ट के आदेश के बारे में पूछताछ करते रहे। लोगों में इस बात को लेकर सस्पेंस बना हुआ है कि अब आखिर क्या होगा। क्या उन्हें जमीन खाली करनी होगी या फिर सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल जाएगी। मामले को लेकर प्रभावित लोग अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। वृंदावन कॉलोनी में शनिवार को प्रभावितों की बैठक हुई। इस बैठक में तय किया गया कि रविवार शाम 5 बजे पंजाब भवन में सभी प्रभावित एकजुट होंगे और आपस में चर्चा कर सुप्रीम कोर्ट जाने के संबंध में निर्णय लेंगे।
बस्तर राजपरिवार से भी कॉलोनी के लोग कर सकते हैं बातचीत
शहर के वृंदावन कॉलोनी के रहवासियों की शनिवार को हुई पहली बैठक में इस बात को लेकर भी चर्चा हुई कि मामले में बस्तर महाराजा कमलचंद भंजदेव से भी एक बार चर्चा की जाएगी। इस दौरान कॉलोनी के लोगों ने कहा कि बस्तर महाराजा से सुप्रीम कोर्ट में मामला दाखिल होने के बाद बातचीत की जाएगी। संभव है कि वही कॉलोनी के लोगों की परेशानी समझें और उसका हल निकालें।
मामले का सुप्रीम कोर्ट जाना तय
शहर के कानून के जानकारों का कहना है कि मामले में निचली अदालत ने रानी वेदवती के पक्ष और कमलचंद भंजदेव के विपक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो निचली अदालत का फैसला बदल गया। अब कमलचंद भंजदेव को ही कोर्ट ने जमीन का असली हकदार माना है। इस शहर में चर्चा होती रही कि रानी वेदवती वाला पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाएगा।
बड़ा फैसला है
हाईकोर्ट के इस फैसले को लेकर पडऩे वाले प्रभाव को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कॉलोनी के प्रभावितों के व्हाट्सएप ग्रुप में कई लोगों ने दावा किया कि किसी भी राजपरिवार की संपत्ति को लेकर पहले कभी किसी विवाद में ऐसा फैसला नहीं आया होगा। पहली बार हो रहा है कि इतने बड़े क्षेत्र में जमीन की बिक्री को रद्द कर दिया गया है। 38 एकड़ क्षेत्र को खाली कराने का आदेश दिया गया है। ऐसा देश में पहली बार हो रहा है। इस फैसले से हजारों लोग और सैकड़ों परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
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