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Chhattisgarh Naxal News: नक्सलियों की पाबंदियों से आजादी, बस्तर में फिर से बस रहे परिवार, जागी पिता बनने की उम्मीद

Naxalism impact in Chhattisgarh: रिवर्स ऑपरेशन और पुनर्वास प्रयासों के चलते कई परिवार फिर से बस रहे हैं और लोगों में पिता बनने की उम्मीद जाग रही है। यह बदलाव क्षेत्र में शांति और सामान्य जीवन की वापसी का संकेत माना जा रहा है।
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जगदलपुर

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शेख तैयब ताहिर

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Updated: 22 Jun 2026, 9:28 AM IST

Chhattisgarh Naxal News

बस्तर में फिर से बस रहे परिवार (Photo Patrika)

Naxal Affected Area Update: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति के बाद आम लोग ही नहीं, खुद आत्मसमर्पित नक्सलियों का जीवन भी बदल रहा है। बरसों सामानक प्री बनने के बजाय खाक एनकाउंटर के साये में जी रहे ये नक्सली आत्मसमर्पण के बाद अब समाज की मुख्यधारा में लौटे तो उनका परिवार भी बस रहा है, और पिता बनने की हसरत भी पूरी हो रही है। शासन ने मानवीय पहल के तहत नक्सली संगठन में सक्रिय रहने के दौरान जबरन नसबंदी (वासेक्टॉमी) का शिकार हुए पुरुषों को दोबारा पितृत्व सुख दिलाने के लिए विशेष 'रिवर्स वासेक्टॉमी' अभियान शुरू किया है।

73 आत्मसमर्पित नक्सलियों की सर्जरी

ढाई माह में 73 आत्मसमर्पित नक्सलियों की यह सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी है। बीते दिनों एक विवाह सम्मेलन में पहली बार सामाजिक और धार्मिक रीति-रिवाजों से दो आत्मसमर्पित नक्सली जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। प्रशासन अन्य नक्सली जोड़ों के भी सामूहिक विवाह की तैयारी कर रहा है। अब पूर्व नक्सली महिला के माथे पर गोली नहीं सिदूर है तो पुरुष की गोद में आइईडी नहीं अपने लाडले की उम्मीद है।

गोद में आइईडी के बजाय होगा अपना लाडला

पहले जीवन में केवल संघर्ष था, भविष्य धुंधला था। आज शादी के बाद मेरे पास परिवार बसाने, सम्मानजनक रोजगार करने और सिहर उठाकर जीने के सपने हैं। वड्डीराम सोढ़ी, पूर्व नक्सली, 2025 में आत्मसमर्पण

बंदूक से सिंदूर तक पहुंचे

जगवलपुर के टाउन हॉल में बीते दिनों मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह समारोह में 17 जोडे परिणय सूत्र में बंधे, जिनमें दो जोड़े आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों के थे। जिन हाथों में कभी बंदूक थी उन हाथों से पत्नी की मांग भरी। उन्होंने सामाजिक और धर्मिक रीति-रिवाज के साथ वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। बड़ी संख्या में अन्य समर्पित युवा नक्सली भी शादी करना चाहते हैं। प्रशासन जोड़ों के आवेदन पर शादी का इंतजाम करता है।

दो माह की बच्ची का पिता बना

पहले भी पूर्व नक्सलियों के ऐसे ऑपरेशन किए गए लेकिन अब संख्या अधिक होने से शिविर लगाए जा रहे हैं। एसपी शलभ सिन्हा एक साल पहले रिवर्स वासेक्टॉमी का लाभ लेने वाला एक आत्मसमर्पित नक्सली हाल ही में माह की बच्ची का पिता बना है।

शादी पर था बैन कराते थे जबरन नसबंदी

महिला-पुरुष कैडर वाले नक्सली संगठनों में कड़े कड़े अनुशासन के चलते प्रेम और शादी पर प्रतिबंध था। ऐसा करने का प्रयास करने पर मौत की सजा तक मिलती थी। संगठनों ने पुरुष कैडर की जबरन जबर नसबंदियां तक करवाई थी। संगठन को डर था कि पिता बनने के बाद लड़ाके पारिवारिक जिम्मेदारियों में उलझ जाएंगे।

शिविर लगाकर जटिल ऑपरेशन

जगदलपुर के महारानी अस्पताल में जिला प्रशासन, पुलिस और यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में निःशुल्का रिवर्स वारोक्टॉमी रीकैनालाइजेशन' सर्जिकल कैंप आयोजित किए गए। शिविरों में मुंबई, रायपुर के शीर्ष यूरोलॉजिस्ट और माइकोसर्जरी विशेषज्ञों ने अपनी सेवाएं दीं। यूरोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुकरेजा ने बताया कि पहले चरण में 33 और दूसरे चरण में 40 सफल सर्जरियां की गई। डॉ. कुकरेजा के अनुसार, रिवर्स वासेक्टॉमी दुनिया की सबसे जटिल माइक्रोसर्जरी प्रक्रियाओं में से एक है, जिसमें नसबंदी के दौरान काटी गई सूक्ष्म शुक्रयाहिकाओं को दोबारा जोड़ा जाता है। इससे पुरुष पिता बन सकता है।

सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास

यह पहल मुख्यधारा में लौटे और सामान्य सामाजिक जीवन देने का एक दृढ़ प्रयास है। ऐसे अभियानों के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। कई परिवारों के घरों में बच्चों की किलकारियां गूंजी हैं और उन्हें खुशी मिलने वाली है। -सुंदरराज पी. आइजी, बस्तर रेंज