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बस्तर का White Gold! पहली बारिश में ही बनाया नया रिकॉर्ड, मार्केट में ताबड़तोड़ हो रही खरीदारी

Boda Season: बस्तर का व्हाइट गोल्ड कहलाने वाला बोड़ा पहली बारिश के साथ जंगलों से निकलता है। 3200 रुपए किलो तक बिकने वाली इस दुर्लभ वन उपज से हर साल लाखों का कारोबार होता है। जानिए इसकी पूरी कहानी।

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Bastar White Gold

पहली बारिश और 3200 रुपए किलो का बोड़ा (photo source- Patrika)

Bastar Boda Season: बस्तर में जब पहली बारिश की बूंदें साल के घने जंगलों को भिगोती हैं, तब सिर्फ मौसम नहीं बदलता, बल्कि जंगल की जमीन के नीचे छिपा एक अनमोल खजाना भी बाहर आने लगता है। यह खजाना न सोना है, न चांदी और न ही कोई बहुमूल्य रत्न। बस्तर के लोग इसे प्यार से ‘व्हाइट गोल्ड’ कहते हैं। इसका नाम है बोड़ा। देशभर में जहां किसान खेतों में फसल उगाने के लिए महीनों मेहनत करते हैं, वहीं बस्तर का बोड़ा प्रकृति का ऐसा उपहार है जिसे न बोया जा सकता है और न ही इसकी खेती की जा सकती है।

यह केवल प्रकृति की विशेष परिस्थितियों में साल (सरई) के जंगलों के बीच स्वतः उगता है। यही वजह है कि इसकी कीमत कई बार अच्छे-खासे ड्राई फ्रूट्स और विदेशी खाद्य पदार्थों से भी ज्यादा हो जाती है। इस साल भी प्री-मानसून की पहली बारिश के साथ बस्तर के बाजारों में बोड़ा की पहली खेप पहुंची और इसकी कीमत 3200 रुपए प्रति किलो तक दर्ज की गई। यह पिछले वर्षों के मुकाबले नया रिकॉर्ड माना जा रहा है।

Wild mushrooms: आखिर क्या है बस्तर का व्हाइट गोल्ड?

बोड़ा एक प्रकार का प्राकृतिक फंगस (मशरूम वर्ग) है, जो साल वृक्षों की जड़ों के आसपास जमीन के भीतर विकसित होता है। पहली बारिश के बाद जब मिट्टी में पर्याप्त नमी और उमस पैदा होती है, तब यह अचानक जमीन को चीरकर बाहर निकलता है। दिखने में साधारण लगने वाला यह बोड़ा अपने स्वाद, दुर्लभता और पोषण गुणों के कारण बेहद खास माना जाता है। बस्तर के आदिवासी समुदाय सदियों से इसे जंगल का अनमोल उपहार मानते आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बोड़ा की तलाश भी किसी खजाने की खोज से कम नहीं होती। जंगलों की मिट्टी, मौसम और साल के पेड़ों की पहचान रखने वाले ग्रामीण ही इसे आसानी से खोज पाते हैं।

बारिश शुरू होते ही जंगलों की ओर दौड़ पड़ते हैं ग्रामीण

मानसून की पहली बारिश के बाद बस्तर के कई गांवों में सुबह का दृश्य बदल जाता है। सूरज निकलने से पहले ही ग्रामीण टोकरी और थैले लेकर जंगलों की ओर निकल पड़ते हैं। उनकी नजरें साल के पेड़ों के नीचे की मिट्टी पर टिकी रहती हैं। जैसे ही मिट्टी में हल्की दरार दिखाई देती है, लोग समझ जाते हैं कि नीचे बोड़ा मौजूद है। सावधानी से मिट्टी हटाकर इसे निकाला जाता है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही इसकी गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। कई परिवारों के लिए यह सिर्फ जंगल की उपज नहीं, बल्कि बारिश के मौसम में अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण साधन भी है।

एक महीने में लाखों का कारोबार

बोड़ा का सीजन बहुत लंबा नहीं होता। सामान्यतः यह केवल 20 से 30 दिनों तक ही बाजार में उपलब्ध रहता है। लेकिन इस छोटे से समय में इसका कारोबार लाखों रुपए तक पहुंच जाता है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार बस्तर में हर साल बोड़ा के व्यापार से करीब 50 लाख रुपए या उससे अधिक का कारोबार होता है। शुरुआती दिनों में इसकी कीमत सबसे ज्यादा रहती है क्योंकि आवक कम और मांग अधिक होती है। जैसे-जैसे जंगलों से इसकी मात्रा बढ़ती है, कीमतों में कुछ गिरावट आती है, लेकिन फिर भी यह आम सब्जियों की तुलना में कई गुना महंगा बना रहता है।

बस्तर से बाहर भी है जबरदस्त मांग

कभी केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित रहने वाला बोड़ा अब बस्तर की सीमाओं को पार कर चुका है। इसकी मांग ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य भारत के कई हिस्सों में तेजी से बढ़ रही है। व्यापारी बस्तर से बोड़ा खरीदकर दूसरे राज्यों तक पहुंचाते हैं। कई लोग विशेष रूप से बस्तर से बोड़ा मंगवाते हैं ताकि मानसून के दौरान इसके अनूठे स्वाद का आनंद ले सकें।

स्वाद ऐसा कि लोग सालभर करते हैं इंतजार

बोड़ा का स्वाद ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। स्थानीय लोग इसे मसालों के साथ पारंपरिक तरीके से पकाते हैं। इसकी सब्जी, फ्राई और अन्य व्यंजन बेहद लोकप्रिय हैं। बस्तर में कई परिवार ऐसे हैं जो मानसून शुरू होते ही सबसे पहले बाजार जाकर बोड़ा खरीदते हैं। सीमित समय के लिए उपलब्ध होने के कारण लोग पूरे साल इसके सीजन का इंतजार करते हैं। स्थानीय होटल और ढाबों में भी बोड़ा से बने विशेष व्यंजन ग्राहकों को आकर्षित करते हैं।

पोषण का भी पावरहाउस

बोड़ा सिर्फ स्वाद का खजाना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, पोटैशियम, सेलेनियम और विटामिन-डी जैसे कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और पोषण संतुलन बनाए रखने में मददगार होता है। यही कारण है कि ऊंची कीमत के बावजूद लोग इसे खरीदने से पीछे नहीं हटते।

Bastar special vegetable dish: विदेशी पर्यटक भी हो जाते हैं दीवाने

बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता देखने आने वाले विदेशी पर्यटक भी बोड़ा का स्वाद चखना नहीं भूलते। स्थानीय संस्कृति और खानपान को करीब से जानने की इच्छा रखने वाले पर्यटकों के बीच बोड़ा एक आकर्षण का केंद्र बन चुका है। कई पर्यटक इसे "फॉरेस्ट ट्रफल" या जंगल का दुर्लभ मशरूम मानकर इसकी जानकारी जुटाते हैं और स्थानीय व्यंजनों का हिस्सा बनाते हैं।

सिर्फ सब्जी नहीं, बस्तर की पहचान

बोड़ा आज केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं रह गया है। यह बस्तर की जैव विविधता, पारंपरिक ज्ञान और वन आधारित अर्थव्यवस्था का प्रतीक बन चुका है। जब पहली बारिश के साथ साल के जंगलों से सफेद रंग का यह खजाना बाहर निकलता है, तब यह केवल बाजारों में ही नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीण परिवारों की उम्मीदों में भी नई चमक भर देता है। इसीलिए बस्तर के लोग इसे सिर्फ बोड़ा नहीं, बल्कि "व्हाइट गोल्ड" कहते हैं—एक ऐसा प्राकृतिक खजाना, जो हर साल कुछ दिनों के लिए आता है, लेकिन अपने पीछे स्वाद, रोजगार और करोड़ों की आर्थिक गतिविधि की कहानी छोड़ जाता है।