केन्द्र ने रिस्क के लिहाज से किया जिलों का वर्गीकरण
नई दिल्ली/जयपुर. कोविड-19 से युद्ध को अधिक धारदार बनाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने देशभर में हाई, मीडियम और लो रिस्क जिले चिह्नित किए हैं। राज्य सरकारों को रिस्क के आधार पर आगे की योजनाएं तैयार करने के लिए कहा गया है। माना जा रहा है कि 3 मई के बाद रिस्क के आधार पर ही लॉकडाउन के तरीके पर निर्णय किया जा सकता है। इस सूची में राजस्थान में जयपुर समेत 19 जिले हाई रिस्क जोन में आए हैं। कोरोना संक्रमण के लिहाज से झुंझुनंू राजस्थान का सर्वाधिक जोखिम वाला जिला है।
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रणनीति बदली
एनडीएमए ने कोरोना युद्ध की रणनीति में बदलाव किया है। इसके तहत संक्रमण का खतरा केवल पॉजीटिव केस की संख्या नहीं बल्कि 8 मापदंडों के आधार पर तय किया है। इनमें एक्टिव केस की संख्या के साथ वहां उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं, वेंटिलेटर की उपलब्धता व आवश्यकता में अंतर, जनसंख्या घनत्व और अन्य मापदंडों को भी आधार बनाया गया है। यही वजह है कि कोरोना मुक्त सिरोही जिला भी लो रिस्क के बजाय मीडियम रिस्क में शामिल किया गया है।
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ये हैं मापदंड (कुल 100 प्रतिशत)
मापदंड प्रतिशत में
जनसंख्या घनत्व 15
60 वर्ष से अधिक की आबादी 10
एक्टिव केस की संख्या 25
लक्षण वाले लोगों की संख्या 15
अस्पताल में भर्ती लोगों की संख्या 10
सर्विलांस में चल रहे लोगों की संख्या 10
आइसीयू पलंग की उपलब्धता व आवश्यकता में अंतर 7.5
वेंटिलेटर की उपलब्धता व आवश्यकता में अंतर 7.5
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राजस्थान में यों हुआ जिलों का वर्गीकरण
हाई रिस्क वाले जिले (अधिक से कम)
जिला
झुंझुनंू
जयपुर
बांसवाड़ा
भरतपुर
टोंक
जोधपुर
भीलवाड़ा
कोटा
जैसलमेर
चूरू
नागौर
अजमेर
झालावाड़
दौसा
डूंगरपुर
बीकानेर
सीकर
धौलपुर
उदयपुर
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मीडियम रिस्क (अधिक से कम)
करौली
गंगानगर
सवाईमाधोपुर
प्रतापगढ़
सिरोही
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लो रिस्क (अधिक से कम)
जालोर
हनुमानगढ़
बारां
बाड़मेर
चित्तौडढ़़
अलवर
पाली
बूंदी
राजसमंद
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इन जिलों में अब तक एक भी कोरोना पॉजिटिव नहीं
बूंदी : लो रिस्क
सिरोही : मीडियम रिस्क
गंगानगर : मीडियम रिस्क
जालोर : लो रिस्क
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प्रदेश में संक्रमण कम हो रहा है, 19 जिलों में ही पॉजिटिव मामले हैं। सात जिले ही ऐसे हैं, जहां संक्रमितों की संख्या 100 या अधिक है। तीन में संक्रमण शून्य हो चुका है। चार जिलों में आज तक कोई मरीज नहीं मिला है। एक हजार से ज्यादा कोरोना डेडिकेटेड अस्पतालों के सामान्य वार्डों में 4800 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। आइसीयू में 9 लोग हैं और 2 वेंटिलेटर पर हैं। जांच क्षमता बढ़ रही है लेकिन आरएनए एक्सट्रेक्शन किट और पीसीआर किट बराबर संख्या में मिलते रहें तो नमूने लम्बित नहीं रहेंगे और इससे संक्रमितों की वास्तविक सख्ंया का पता चल सकेगा।
- रघु शर्मा, चिकित्सा मंत्री, राजस्थान