
Rajasthan News : प्रदेश के बाड़मेर जिले को अब रिफाइनरी के बाद वाटर-वे की सौगात मिलने का रास्ता साफ हो गया है। गुजरात में कच्छ के रण से राजस्थान के बाड़मेर जिले तक वाटर-वे बनाने को लेकर राजस्थान सरकार ने कदम आगे बढ़ा दिया है। केंद्र सरकार के निर्देश के बाद राजस्थान सरकार ने इसके लिए नदी परिवहन की राज्य स्तरीय कमेटी गठित कर दी है। राजस्थान रिवर बेसिन एंड वाटर रिसोर्सेज प्लानिंग कमिश्नर नीरज के पवन की ओर से जारी आदेश के अनुसार कमेटी का अध्यक्ष जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार को बनाया गया है। सदस्यों में पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, रेलवे, परिवहन विभाग, मत्स्य और पर्यटन निगम अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक कच्छ का रण से बाड़मेर तक बनने वाले वाटर-वे की चौड़ाई करीब 100 मीटर तक रखी जा सकती है। गहराई लगभग चार मीटर तक होगी। तीन हजार टन क्षमता के कार्गो शिप (वैसल्स) चल सकेंगे। इनके जरिए सामान का आवागमन सड़क मार्ग के मुकाबले सस्ता होगा।
केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री आफ पोटर्स शिपिंग एंड वाटर-वे ने 22 अप्रेल 2024 को पत्र भेजकर कमेठी गठन के निर्देश दिए थे। इसके बाद राजस्थान सरकार ने कमेटी का गठन किया है। बताया जा रहा है कि गुजरात से राजस्थान तक यह वाटर-वे करीब 490 किलोमीटर लंबा होगा। इसके बनने के बाद पर्यटन के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। वाटर-वे में वैसल्स के जरिए राजस्थान से ढाई मिलियन टन तक एक्सपोर्ट हो सकेगा। पिछले दिनों कोलकाता में नेशनल इनलैंड वाटर-वे अथॉरिटी की बैठक में भी राजस्थान में इनलैंड वाटर-वे टर्मिनल को लेकर चर्चा हुई थी। प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार ने ही वर्ष 2016-17 में वाटर-वे को लेकर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की थी। लेकिन इसके बाद राज्य में कांग्रेस की सरकार आने के बाद प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया था।
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