ब पांच हजार स्क्वायर मीटर से ज्यादा एरिया की किसी भी बिल्डिंग पर ग्रीन बिल्डिंग कोड लागू होगा। चाहे वह रेजीडेंशियल हो या कमर्शियल, एेसी सभी बिल्डिंग्स को एन्वार्यनमेंट फ्रैंडली बनाने के लिए एन्वायर्नमेंटल इम्पेक्ट असेसमेंट (ईएआई) एक्ट का नया नोटिफिकेशन जारी किया गया है।
अब पांच हजार स्क्वायर मीटर से ज्यादा एरिया की किसी भी बिल्डिंग पर ग्रीन बिल्डिंग कोड लागू होगा। चाहे वह रेजीडेंशियल हो या कमर्शियल, एेसी सभी बिल्डिंग्स को एन्वार्यनमेंट फ्रैंडली बनाने के लिए एन्वायर्नमेंटल इम्पेक्ट असेसमेंट (ईएआई) एक्ट का नया नोटिफिकेशन जारी किया गया है। लेकिन इसके लिए पहले राज्य सरकारों को इसे अपने स्टेट में लागू करना होगा।
नए नोटिफिकेशन के मुताबिक, उक्त एरिया से ज्यादा का निर्माण एनर्जी एफिशियेंट कोड के अनुसार ही होगा। इनकी बाकायदा ऑडिट होगी और नगर निगम की भी इसमें भूमिका रहेगी। खास बात यह है कि निगम से बिल्डिंग को कम्प्लीशन सर्टिफिकेट तभी मिलेगा, जब उसने ग्रीन बिल्डिंग की शर्तें पूरी की होंगी। हालांकि इसे इम्प्लीमेंट करना पूरी तरह राज्य सरकार के हाथ में है।
एमएनआईटी में सोमवार से अरबन एन्वायर्नमेंटल मैनेजमेंट पर शुरू हुई दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस के पहले दिन ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन इंक (जीबीसीआई) के टेक्नीकल डिपार्टमेंट की जनरल मैनेजर हिना जीया ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्रीन बिल्डिंग को प्रमोट करने के लिए स्टेट इंसेंटिव्स भी दे सकते हैं।
हिना ने कहा कि ग्रीन बिल्डिंग पहले हौवा होता था, लेकिन अब आमजन में इसकी जागरुकता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी का मतलब नदी, नालों को खत्म करना नहीं है, बल्कि इसकी सिस्टेमैटिक प्लानिंग है। जयपुर जैसे शहर अच्छी तरह प्लांड हैं, इसलिए इन शहरों की मूल दशा नहीं बिगडऩी चाहिए। कॉन्फ्रेंस कॉर्डिनेटर तारुष चंद्रा ने बताया कि 150 पार्टिसिपेंट्स हिस्सा ले रहे हैं। कांन्फ्रेंस का उद्घाटन जयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीईओ संदेश नायक ने किया।