
Agriculture Officer Bribe Case: खाद-कीटनाशक निर्माण इकाइयों के निरीक्षण के नाम पर कथित अवैध वसूली के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। एसीबी के अनुसार जिन दो कृषि अधिकारियों के बैग से 2.63 लाख रुपए संदिग्ध हालत में मिले थे उन्होंने कार्रवाई से पहले पिछले दो महीनों में अपने वेतन खातों से कोई बड़ी रकम नकद निकाली ही नहीं थी। यानी बरामद रकम को बैंक से हाल ही निकाली गई राशि बताने का अधिकारियों का दावा जांच में पूरी तरह खारिज हो गया है। एसीबी अब इस रकम के वास्तविक स्रोत और संभावित लेनदेन से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है।
गौरतलब है कि एसीबी ने बीते 2 जुलाई को शाहपुरा में कृषि विभाग की निरीक्षण टीम के वाहन की तलाशी ली थी। कार्रवाई के दौरान कृषि अधिकारी चन्दराम गुर्जर के बैग से 1.15 लाख रुपए और कृषि अधिकारी महेश कुमार मीणा के बैग से 1.48 लाख रुपए बरामद हुए थे। दोनों अधिकारियों के पास यह रकम अलग-अलग सफेद लिफाफों तथा एक पैकेट में रखी हुई थी जिसे एसीबी ने संदिग्ध मानते हुए मौके पर ही जब्त कर लिया था। तलाशी के दौरान बरामद नकदी को लेकर अधिकारियों से मौके पर भी पूछताछ की गई थी।
जांच के दौरान एसीबी ने दोनों अधिकारियों के वेतन खातों का पूरा विवरण जुटाया। रिकॉर्ड के मुताबिक चन्दराम गुर्जर का जून 2026 का सकल मासिक वेतन 95,390 रुपए और महेश कुमार मीणा का 94,025 रुपए था। एसीबी के मुताबिक दोनों अधिकारियों के भारतीय स्टेट बैंक के वेतन बचत खातों के पिछले दो माह के स्टेटमेंट खंगालने पर भी किसी बड़ी नकद निकासी की पुष्टि नहीं हुई। पूछताछ के दौरान रकम को लेकर दिए गए उनके स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए गए और बयानों में भारी विरोधाभास सामने आया।
जांच अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों के मोबाइल फोन की प्रारंभिक पड़ताल में कई औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ वॉट्सऐप चैट और कॉल डिटेल मिली हैं। एसीबी ने इन चैट और वॉयस कॉल रिकॉर्ड्स के प्रिंटआउट लेकर मामले की केस फाइल में शामिल कर लिए हैं। ठोस सबूत जुटाने के बाद अब एसीबी ने दोनों कृषि अधिकारियों के खिलाफ नियमित एफआइआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।