
जनता को राहत दिलाने के लिए प्रभावी जवाबदेही कानून की मांग को लेकर जनसंगठन एक बार फिर मुखर हो गए हैं। इस कानून के लिए पहली जवाबदेही यात्रा दिसंबर 2015 निकाली गई, इसके बाद दो बार और यात्रा निकाली गईं। अब दिसंबर में फिर से यात्रा शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
विभिन्न जनसंगठनों की ओर से मंगलवार को यहां जवाबदेही कानून की मांग को लेकर मीडिया से बात की। सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान के प्रतिनिधि निखिल डे ने कहा कि कांग्रेस ने चार साल पहले वादा किया, लेकिन अभी तक जवाबदेही कानून नहीं आया है।
सरकार ने राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी और जवाबदेही विधेयक का ड्राफ्ट जारी किया है , लेकिन इसमें रामलुभाया कमेटी और अभियान की ओर से सुझाए गए कई महत्वपूर्ण प्रावधान गायब हैं। प्रक्रिया, समय सीमा, कानूनी कार्यवाही को स्पष्ट नहीं किया तो कानून प्रभावी नहीं बन पाएगा।
पीयूसीएल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने कहा कि दिसंबर में एक बार फिर यात्रा शुरू की जाएगी। सामाजिक कार्यकर्ता शंकर ने सम्पर्क पोर्टल की हेल्पलाइन को लेकर शिकायत की।
यह भी बताया
अप्रेल 2018 से पेंशन नहीं मिली, प्रार्थिया नेे शिकायत की तो जवाब मिला मनीआर्डर भेज दिया। इसी तरह की शिकायत एक ऐसी महिला की है, जो बोल और सुन नहीं सकती तथा निराश्रित है। कई उदाहरण बताए गए, जिनमें खाद्य सुरक्षा में नाम जुड़वाने, पेंशन, पट्टा लेने,पीएम आवास की किस्त नहीं मिलने व नरेगा भुगतान के लिए पीड़ित भटक रहे हैं।
शिकायत की परिभाषा व शिकायतों के निस्तारण की समयसीमा
जिला स्तर पर अपील के लिए विकेंद्रीकृत व्यवस्था
राज्य स्तर पर स्वतंत्र शिकायत निवारण आयोग