
नई दिल्ली.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सिख गुरु गोविंद सिंह के साहिबजादों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने साहिबजादों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि उनकी कम उम्र के बलिदान में उपदेश छिपा हुआ है। भारत को अगर सफलता के शिखर पर ले जाना है तो अतीत के संकुचित नजरिए से आजाद होना होगा।
दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों की शहादत की याद में पहले वीर बाल दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि औरंगजेब के भारत को बदलने के मंसूबों के आगे गुरु गोविंद सिंह जी पहाड़ की तरह खड़े थे। औरंगजेब ने उनके दो निर्दोष बालकों को दीवार में चिनवाने की दरिंदगी इसलिए की, क्योंकि वह और उसके लोग गुरु गोविंद सिंह जी का धर्म तलवार की जोर पर बदलना चाहते थे। मोदी ने कहा कि जिस समाज और राष्ट्र में नई पीढ़ी जोर-जुल्म के आगे घुटने टेक देती है, उसका आत्मविश्वास और भविष्य अपने आप मर जाता है। साहिबजादों के त्याग और इतनी बड़ी शौर्यगाथा को इतिहास में भुला दिया गया। अब नया भारत दशकों पहले हुई भूल को सुधार रहा है। मोदी ने कहा कि हमें इतिहास के नाम पर गढ़े हुए नरेटिव बताए और पढ़ाए जाते रहे, जिससे हमारे अंदर हीन भावना पैदा हो, लेकिन हमारी परंपराओं ने इन गौरव गाथाओं को जीवित रखा।
अकाल तख्त और एसजीपीसी नाखुश
केंद्र सरकार ने नौ जनवरी को गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व पर उनके साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत की याद में 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) 'वीर बाल दिवस' के नामकरण से खुश नहीं है। एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने एक बयान में कहा, भारत सरकार मनगढ़ंत सिख इतिहास रचने की राह पर है।