
MMDR Amendment Bill : अशोक गहलोत। फाइल फोटो पत्रिका
MMDR Amendment Bill : केंद्र सरकार राज्यों की खानों व खनिज संपन्न जमीनों पर अपना नियामक नियंत्रण बढ़ाने जा रही है। सरकार ने खनिज संपदा वाले राज्यों के लिए संसद में संशोधित कानून का प्रस्ताव किया है, जिससे राज्यों की खनिज राजस्व जुटाने और खनिज संसाधनों पर वित्तीय अधिकार की मौजूदा तस्वीर बदल जाएगी। इसकी चाबी केंद्र सरकार के पास होगी। इस MMDR Amendment Bill का विरोध करते हुए कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने राजस्थान की भजनलाल सरकार को सतर्क किया है। गहलोत ने कहा कि राजस्थान की भाजपा सरकार को इस पर तुरंत आवाज उठानी चाहिए, वरना यह चुप्पी राजस्थान के खनिज राजस्व और रोजगार दोनों के साथ विश्वासघात मानी जाएगी।
अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा कि केंद्र की भाजपा सरकार अब राज्यों की खनिज संपदा पर भी सीधा डाका डालने जा रही है। MMDR संशोधन बिल के जरिए खनिज जमीनों पर टैक्स, रॉयल्टी, सेस लगाने की चाबी अब राज्यों के हाथ से छीनकर केंद्र अपनी मुट्ठी में लेना चाहता है। राजस्थान, जहां 34,445 खदानें हैं, 10,394 करोड़ रुपए राजस्व और 30 लाख लोगों को रोजगार मिलता है, उसकी आर्थिक स्वायत्तता पर यह सीधा हमला है।
अशोक गहलोत ने लिखा कि सबसे शर्मनाक प्रावधान यह है कि नई धारा 9डी के जरिए राज्यों का पुराना बकाया टैक्स भी अब वसूल नहीं हो पाएगा, यानी राज्यों का हक का पैसा भी हड़प लिया जाएगा।
अशोक गहलोत ने आगे लिखा कि "समान टैक्स ढांचे" का यह ढोंग नया नहीं है। इसी तर्क के सहारे पहले जीएसटी लागू कर राज्यों को भारी नुकसान पहुंचाया गया था, और जिस अनुपात में मुआवजा मिलना चाहिए था, वह भी पूरा नहीं मिला। अब खनिज राजस्व पर भी वही खेल दोहराया जा रहा है। यह कोई प्रशासनिक सुधार नहीं, राज्यों को हर मोर्चे पर केंद्र के आगे झुकाकर पूरी तरह निर्भर बनाने की सुनियोजित रणनीति है। अशोक गहलोत ने लिखा कि राजस्थान की भाजपा सरकार को इस पर तुरंत आवाज उठानी चाहिए, वरना यह चुप्पी राजस्थान के खनिज राजस्व और रोजगार दोनों के साथ विश्वासघात मानी जाएगी।
खान मंत्री जी.किशन रेड्डी ने सोमवार को लोकसभा में माइंस एंड मिनरल्स (डवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल (एमएमडीआर) पेश किया है। जिसके तहत खनिज अधिकारों या खनिज वाली जमीन पर टैक्स, रॉयल्टी, सेस या अन्य लेवी मनमाने तरीके से नहीं लगा सकेंगी। ऐसे करों पर केंद्र सरकार शर्तें और प्रतिबंध तय कर सकेगी।
खास बात यह है कि पहली बार सामान्य खनिज वाली जमीन को लेकर भी बड़ा कानूनी बदलाव किया जा रहा है। यदि किसी जमीन में तय मात्रा में खनिज है, तो उसके इस्तेमाल और नियमन में केंद्र सरकार की भूमिका बढ़ जाएगी। मौजूदा कानून में केंद्र का नियंत्रण मुख्यतः खदानों और खनिजों के विकास तक ही है। नए बिल में इसका दायरा खनिज वाली जमीन तक बढ़ा दिया गया है।
बिल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा केवल भविष्य के टैक्स पर रोक नहीं है। प्रस्तावित नई धारा 9 डी के मुताबिक यदि किसी राज्य सरकार ने संशोधित प्रावधान लागू होने से पहले खनिज अधिकारों या खनिज वाली जमीन पर ऐसा टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाया है, लेकिन वह राशि जमा नहीं कराई गई तो उसे अवैध माना जाएगा यानी इसे जमा कराने की जरूरत नहीं होगी। जो राशि पहले ही जमा या वसूल हो चुकी है, उसे वापस करने की देनदारी नहीं होगी।
Updated on:
11 Aug 2026 08:15 pm
Published on:
11 Aug 2026 08:15 pm
