
AI Traffic System Jaipur: जयपुर में जाम और प्रदूषण कम करने के लिए महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा की पहल पर राजस्थान पुलिस अब ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए एक अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने जा रही है। बहुत जल्दी शहर का ट्रैफिक पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित होगा। जयपुर के सबसे व्यस्त इलाके रामबाग सर्किल पर इसका 'डेटा कोर इन्फोटेक' के सहयोग से 39 दिनों के लिए ट्रायल किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा। अब इसके बाद पुलिस कमिश्नरेट जयपुर शहर के 423 चौराहों में से 253 प्रमुख चौराहों को इस एआई-आधारित स्मार्ट कैमरे और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) से जोड़ने जा रही है। ट्रैफिक डीसीपी श्री योगेश गोयल के नेतृत्व में इस पूरी परियोजना की मॉनिटरिंग की गई और ट्रायल के ऐतिहासिक नतीजों के बाद अब इसे पूरे शहर में विस्तार देने का फैसला लिया गया है।
डेटा कोर इन्फोटेक के निदेशक बसंत गोस्वामी और ओजस शुक्ला ने बताया कि अभी तक चौराहों पर लाल और हरी बत्ती के लिए समय (जैसे 60 या 90 सेकंड) तय रहता है, चाहे किसी एक सड़क पर ट्रैफिक खाली हो और दूसरी पर 1 किलोमीटर लंबा जाम हो। लेकिन नया एआई-पावर्ड आईटीएमएस (ITMS) इससे बिल्कुल अलग है। चौराहे पर लगे एआई कैमरे चौबीसों घंटे लाइव वाहनों की संख्या और कतार की लंबाई को स्वतः मापते हैं। जिस सड़क पर वाहनों का दबाव ज्यादा होगा, एआई सिस्टम खुद-ब-खुद वहां का ग्रीन टाइम बढ़ा देगा और खाली सड़क का समय घटा देगा। इस सिस्टम को चलाने के लिए किसी ट्रैफिक पुलिसकर्मी को रिमोट या बटन दबाने की जरूरत नहीं पड़ती, यह 24 घंटे पूरी तरह ऑटोमैटिक काम करता है।
3 जून 2026 से 11 जुलाई के बीच रामबाग सर्किल पर किए गए पायलट प्रोजेक्ट के दौरान एआई सिस्टम ने बेहतरीन परिणाम दिए हैं। इस दौरान सिस्टम ने बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के 4,88,140 से ज्यादा वाहनों को सुगमता से पार करवाया। एआई नियंत्रण के कारण वाहन चालकों को प्रत्येक लेन में 8 से 45 सेकंड की सीधी बचत हुई और औसत लेन ग्रीन टाइम 33.63 सेकंड रिकॉर्ड किया गया। चौराहों पर वाहनों के कम समय रुकने और स्मूथ ट्रैफिक फ्लो के कारण 39 दिनों में कुल 2,535 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड गैस का उत्सर्जन कम हुआ, जो दैनिक स्तर पर 65 किलोग्राम की बचत है।
यह एआई सिस्टम ट्रैफिक मैनेज करने के साथ-साथ चौराहों पर अनुशासन भी बनाए रखेगा। ट्रायल के दौरान सामने आया कि एक कैमरा रोजाना करीब 4200 गाड़ियों को रीड करता है, जिसमें से औसतन 450 वाहनों के चालान की सटीक जानकारी सिस्टम स्वतः दर्ज कर लेता है। इसके लागू होने से ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप, रॉन्ग साइड ड्राइविंग और लेन उल्लंघन करने वाले वाहन अब बच नहीं पाएंगे। इसके अलावा, यदि किसी वाहन पर पहले से कोई चालान बकाया या लंबित है, तो एआई कैमरा उस गाड़ी के नंबर प्लेट को स्कैन करते ही उसकी पूरी जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम को उपलब्ध करा देगा।
डेटा कोर इन्फोटेक के निदेशक बसंत गोस्वामी और ओजस शुक्ला के अनुसार, इस सिस्टम को आगे चलकर पूरे स्मार्ट सिटी मिशन से जोड़ने की योजना है। रामबाग सर्किल पर इसका पहला एआई ट्रायल सफल रहा है। अब अगले चरण में शहर के कई चौराहों के एआई सिस्टम आपस में जुड़कर ट्रैफिक को अपने आप कंट्रोल करेंगे। वहीं भविष्य में एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और वीआईपी मूवमेंट के दौरान सिस्टम खुद ही ग्रीन सिग्नल देकर उन्हें बिना जाम के निकलने में मदद करेगा। इस तकनीक के लागू होने से लोगों का सफर आसान होगा, समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। साथ ही ट्रैफिक पुलिस को हर चौराहे पर खड़े रहने की जरूरत कम पड़ेगी और वह जाम, दुर्घटना संभावित इलाकों, स्कूलों और बाजारों जैसे संवेदनशील स्थानों पर ज्यादा ध्यान दे सकेगी।