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PATRIKA PODCAST : दाम्पत्य की साम्राज्ञी

पुरुष शरीर से घन, प्राण से तरल और मन से विरल रहता है (अधिकांशत:), जबकि स्त्री मन से घन, प्राण से तरल और शरीर से विरल होती है। यही दोनों का प्राकृतिक स्वरूप है।
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Gulab Kothari Article : दाम्पत्य भाव में स्त्री देह से- देह के लिए नहीं जीती। उसका आत्मभाव प्रबल रहता है—अन्तर्दृष्टि भी गहन होती है। उसके पास सम्पूर्ण जीवन की झलक रहती है। वह क्यों यहां आई- क्या-क्या करना है और चले जाना है। एक कर्ता भाव के साथ दाम्पत्य जीवन का पूर्ण संचालन अपने हाथ में रखती है। स्त्री का सारा व्यवहार पुरुष के लिए परोक्ष भाव का लगता है।