
Ease of Doing Business : नीति आयोग की ओर से जारी निवेश अनुकूलता सूचकांक में राजस्थान को 'अग्रणी राज्य' की श्रेणी में स्थान मिला है। समग्र रैंकिंग में राजस्थान देशभर में 10वें तथा बड़े राज्यों की श्रेणी में 8वें स्थान पर है। बड़े राज्यों की श्रेणी में नियमों के सरलीकरण में राजस्थान ने दूसरा, निवेश प्रोत्साहन नीतियों में तीसरा तथा संसाधनों के क्षेत्र में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। सरकार का मानना है कि यह राज्य में निवेश को बढ़ावा देने, उद्योगों के लिए बेहतर माहौल तैयार करने और कारोबार को आसान बनाने की दिशा में किए गए सुधारों का परिणाम है।
उद्योग विभाग का कहना है कि राज निवेश पोर्टल को प्रभावी बनाया गया है। इस पोर्टल पर 18 विभागों की 190 सेवाएं उपलब्ध हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में पोर्टल पर कुल 34,704 आवेदन प्राप्त हुए। वर्तमान वित्तीय वर्ष की अप्रैल से अब तक की पहली तिमाही में 30 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 17 हजार से अधिक का निस्तारण किया जा चुका है। इस दौरान 64 प्रतिशत आवेदनों का निस्तारण किया गया।
1- राजस्थान में उद्योगों के लिए नए विद्युत कनेक्शन के लिए वेटिंग पीरियड 20 दिनों से घटाकर 10 दिन हो गई है।
2- पर्यटन प्रोजेक्ट की स्वीकृति अवधि 22 दिनों से घटकर 16 दिन हो गई है।
3- 30 से ज्यादा नई उद्योग प्रोत्साहन नीतियों की घोषणा।
4- सरकारी विभागों की ओर से निवेशकों के साथ नियमित संवाद।
5- उद्योगों के लिए लैंड अलॉटमेंट में नीलामी की जगह लॉटरी प्रक्रिया।
फोर्टी के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल का कहना है कि सरकार ने प्रदेश में औद्योगिक प्रोत्साहन के लिए ऐसी 30 नीतियां हैं, जिनमें या तो संशोधन किया है या फिर नई नीतियां बनाई हैं। इससे सरकार का विजन स्पष्ट हुआ और उद्यमियों, निवेशकों के लिए निवेश की दिशा प्रशस्त हुई है। नीतियों के समयबद्ध अनुमोदन से प्रदेश में निवेशकों का विश्वास भी मजबूत हुआ है।
राजस्थान चैंबर के अध्यक्ष डॉ. केएल जैन का कहना है कि इन्वेस्टमेंट एमओयू फॉलोअप के बिना असफल होते हैं, लेकिन प्रदेश में राइजिंग राजस्थान में 35 लाख करोड़ के एमओयू के बाद सरकार की ओर से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। विभागों की ओर से निवेशकों के साथ संवाद किया जा रहा है। इसका परिणाम है कि प्रदेश नीति आयोग की रेटिंग में राजस्थान लगातार आगे बढ़ रहा है।