जयपुर

एंकर….एनजीटी की फटकार के बाद भी नहीं थमा प्रदूषण, चंदलाई रामसागर बांध में अब भी पहुंच रहा केमिकल युक्त पानी

Jul 31, 2026
Rajasthan

शिवदासपुरा. चंदलाई स्थित रामसागर बांध को औद्योगिक प्रदूषण से बचाने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सख्त निर्देशों के बावजूद भी हालात में सुधार नहीं आए हैं। अधिकरण ने हाल ही में सुनवाई के दौरान राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरपीसीबी), नगर निगम ग्रेटर और जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को फटकार लगाते हुए पूछा कि अधिकारी शिकायत मिलने के बाद ही क्यों सक्रिय होते हैं। एनजीटी ने संबंधित विभागों को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए हैं।

1300 में से 41 के ही नोटिस:::
सुनवाई के दौरान रिपोर्ट में सामने आया कि सांगानेर क्षेत्र में करीब 1300 औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, लेकिन अब तक केवल 41 इकाइयों को ही नोटिस जारी किए गए हैं। इतने बड़े औद्योगिक क्षेत्र में सीमित कार्रवाई पर एनजीटी ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि बाकी इकाइयों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई और नियमित निगरानी क्यों नहीं रखी गई।


यहां तो धड़ल्ले से चल रही है फैक्टि्रया::: ग्रामीणों का आरोप है कि चंदलाई और आसपास के ग्रामीणों का आरोप है कि एनजीटी के आदेशों के बावजूद रिंग रोड के समीप नहर किनारे और नहरिया के बास क्षेत्र में कई कपड़ा रंगाई एवं प्रोसेसिंग फैक्ट्रियां आज भी लगातार संचालित हो रही हैं। इन इकाइयों से निकलने वाला केमिकल युक्त अपशिष्ट जल बिना समुचित शोधन के नहर में छोड़े जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। यही नहर आगे चलकर चंदलाई रामसागर बांध से जुड़ती है, जिससे बांध का पानी लगातार प्रदूषित होने का खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है, कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कुछ फैक्ट्रियों पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लीग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नियमित रूप से नहर के किनारे संचालित फैक्ट्रियों की निगरानी करे और अपशिष्ट जल निकासी की जांच करे तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि पर्यावरण संरक्षण केवल शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रह सकता। संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि वे नियमित निरीक्षण करें और अवैध गतिविधियों पर समय रहते रोक लगाएं। अधिकरण ने राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण मंडल से टेक्सटाइल उद्योगों से निकलने वाले ठोस एवं तरल अपशिष्ट, सीवेज के उपचार, अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था और पर्यावरणीय अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि रामसागर बांध केवल जल संग्रहण का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के भूजल स्तर, सिंचाई व्यवस्था और स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि केमिकल युक्त पानी का प्रवाह नहीं रोका गया तो इसका असर जल गुणवत्ता के साथ-साथ किसानों, पशुधन और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि एनजीटी के आदेशों की पूरी पालना सुनिश्चित करते हुए नहर किनारे, रिंग रोड और नहरिया के बास क्षेत्र में संचालित सभी कपड़ा फैक्ट्रियों का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए। जो इकाइयां बिना शोधन के दूषित पानी नहर में छोड़ रही हैं, उनके खिलाफ केवल नोटिस जारी करने के बजाय उत्पादन बंद कराने, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति व अन्य कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि चंदलाई रामसागर बांध को लगातार बढ़ रहे औद्योगिक प्रदूषण से बचाया जा सके।
हालांकि जयपुर ग्रामीण प्रदूषण अधिकारी विवेक गोयल से इस मामले में जानकारी लेने के लिए कई बार फोन किया लेकिन उनकी तरफ से कोई जबाव नहीं आया।


Updated on:
31 Jul 2026 06:00 am
Published on:
31 Jul 2026 06:00 am