
जयपुर। जरूरतमंद लोगों को 8 रुपए में भरपेट भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई अन्नपूर्णा रसोई योजना राजधानी में ही दम तोड़ती नजर आ रही है। कम से कम 8 कई रसोइयों पर ताले लटके हैं, जिससे आसपास के जरूरतमंदों को सस्ता भोजन मिलना बंद हो गया है। भोजन की उम्मीद में लोग रसोइयों तक पहुंचते हैं, लेकिन ताला लगा देखकर लौटने को मजबूर हैं। वहीं जो रसोइयां संचालित हो रही हैं, वहां भी निर्धारित समय से पहले भोजन समाप्त हो रहा है।
पत्रिका टीम ने शहर की विभिन्न अन्नपूर्णा रसोइयों का जायजा लिया तो कई केंद्र बंद मिले। स्थानीय लोगों ने बताया कि ये रसोइयां करीब डेढ़ से दो माह से बंद पड़ी हैं। उधर, नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि लाभार्थियों के कूपन में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित संस्था को ब्लैकलिस्ट किया गया है। ऐसे में संचालकों की कथित गड़बड़ी का खामियाजा जरूरतमंद लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार शहर में ऐसी 8 रसोइयों को अप्रेल में ब्लैकलिस्ट किया गया था।
समय : सुबह 11.15 बजे
स्थान : खानिया
अन्नपूर्णा रसोई पर ताला लगा मिला। रसोई कब से बंद है और दोबारा कब शुरू होगी, इसकी कोई सूचना भी नहीं थी। पास के एक व्यापारी ने बताया कि करीब दो माह से यह रसोई बंद है। लोग आते हैं, पूछताछ करते हैं और वापस लौट जाते हैं।
समय : दोपहर 12 बजे
स्थान : रामगढ़ मोड़
यहां भी अन्नपूर्णा रसोई के ताले लगे मिले। पास में रहने वाले व्यापारी अनिल शर्मा ने बताया कि रसोई करीब दो माह से बंद है। भोजन के लिए लोग आते हैं, लेकिन ताला देखकर लौट जाते हैं। लोग लगातार पूछताछ करते हैं, लेकिन उनके पास कोई जवाब नहीं होता।
समय : दोपहर 1 बजे
स्थान : रामगंज चौपड़
चौपड़ के खंदे में स्थित अन्नपूर्णा रसोई भी बंद मिली। गेट पर ताला लगा था। पास में फुटकर सामान बेचने वाली मीनाक्षी लोहार ने बताया कि यह रसोई करीब ढाई माह से बंद है। जब यह संचालित होती थी तब बड़ी संख्या में लोग यहां भोजन करने आते थे। सुबह-शाम लंबी कतारें लगती थीं। अब लोग आकर पूछते हैं कि रसोई कब खुलेगी।
दोपहर 1.30 बजे… न रोटी, न चावल
स्थान: ईदगाह
ईदगाह स्थित अन्नपूर्णा रसोई में दोपहर 1.30 बजे न रोटी उपलब्ध थी और न ही चावल। रसोई में मौजूद रामसिंह ने बताया कि उस दिन का भोजन समाप्त हो चुका है। भोजन करने वालों की झूठी प्लेटें भी केवल 11 ही मिलीं। इस पर रामसिंह ने कहा कि कई लोग भोजन पैक करवाकर ले जाते हैं। वहीं रसोई के बाहर अन्नपूर्णा रसोई का कोई बोर्ड या बैनर भी नहीं लगा मिला।
शहर में 63 अन्नपूर्णा रसोइयां संचालित हो रही हैं और इन पर हर वर्ष करीब 6 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। दो-तीन रसोइयों का संचालन करने वाली संस्था को कूपन अधिक काटने के आरोप में ब्लैकलिस्ट किया गया है। उनकी जगह दूसरी संस्था को जिम्मेदारी दी जा रही है।