
भारतीय सेना में आज 1 July 2026 को एक नए युग की शुरुआत हुई है। General Dhiraj Seth (PVSM, UYSM, AVSM) ने आधिकारिक रूप से भारतीय सेना के 31वें थल सेनाध्यक्ष (Chief of the Army Staff) के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने General Upendra Dwivedi की जगह ली है, जो अपनी शानदार सेवा के बाद रिटायर हुए हैं। लगभग 40 साल की बेदाग और गौरवशाली सैन्य सेवा का अनुभव रखने वाले जनरल धीरज सेठ, एक ऐसे समय में सेना की कमान संभाल रहे हैं, जब भारतीय सेना बड़े बदलावों और आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है। इस बड़ी खबर के बीच सबसे खास बात यह है कि नए सेनाध्यक्ष का राजस्थान राज्य और यहां की रणनीतिक सीमाओं से बेहद पुराना, गहरा और अटूट रिश्ता रहा है।
जनरल धीरज सेठ का राजस्थान से सबसे प्रमुख और बड़ा ऑपरेशनल कनेक्शन नवंबर 2023 में स्थापित हुआ था। इस दौरान उन्होंने जयपुर में हेडक्वार्टर वाली सेना की प्रतिष्ठित दक्षिण पश्चिमी कमान (Sapta Shakti Command) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) के रूप में कार्यभार संभाला था।
इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील पद पर रहते हुए जनरल धीरज सेठ के कंधों पर राजस्थान और पंजाब सेक्टर से सटी भारत-पाकिस्तान की रणनीतिक और लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी थी। जयपुर में उनके कार्यकाल के दौरान सीमा सुरक्षा और सेना के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए थे।
जयपुर कमान के बाद जनरल धीरज सेठ ने सेना की दक्षिणी कमान का नेतृत्व भी संभाला। इस दौरान जब सीमा पार से 'ऑपरेशन सिंदूर' के समय चुनौतियां बढ़ीं, तो उनके नेतृत्व में सेना की टुकड़ियों ने राजस्थान और गुजरात बॉर्डर को पूरी तरह से सुरक्षित किया। उस समय पाकिस्तान की तरफ से होने वाले क्रॉस-बॉर्डर ड्रोन ड्रोन घुसपैठ और हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए जनरल सेठ ने एक काउंटर-रणनीति तैयार की थी। उनके इसी जमीनी अनुभव के कारण राजस्थान के सीमावर्ती जिलों बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर में सेना की चौकसी को एक नए स्तर पर ले जाया गया।
आर्मर्ड कॉर्प्स के एक अत्यंत कुशल और जांबाज अधिकारी होने के नाते जनरल धीरज सेठ को राजस्थान के थार मरुस्थल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में हैवी टैंक ऑपरेशन्स का लंबा और व्यावहारिक अनुभव है। उन्होंने रेगिस्तानी सेक्टर में खुद एक आर्मर्ड रेजिमेंट की कमान संभाली थी। इसके अलावा वे जयपुर स्थित दक्षिण पश्चिमी कमान के मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ (ऑपरेशन्स) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। यही वजह है कि मरुस्थल की तपती गर्मी और रेतीले धोरों के बीच सेना की रणनीतियों को कैसे अंजाम देना है, इसमें उन्हें महारत हासिल है।
राजस्थान के जैसलमेर और पोखरण फायरिंग रेंज में होने वाले सेना के इंटीग्रेटेड मिलिट्री मैन्यूवर्स (एकीकृत सैन्य अभ्यासों) के पीछे जनरल धीरज सेठ एक मुख्य रणनीतिकार रहे हैं। उन्होंने जैसलमेर के धोरों में आयोजित हुए भारतीय सेना के चर्चित 'अखंड प्रहार' अभ्यास की कमान और निगरानी संभाली थी।
इस अभ्यास में थल सेना और वायुसेना के आपसी तालमेल का बेहतरीन प्रदर्शन किया गया था। इन तमाम भूमिकाओं के कारण ही डिफेंस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत की पश्चिमी मरुस्थलीय सीमाओं की सुरक्षा को लेकर जनरल सेठ की समझ और विशेषज्ञता बेजोड़ है।
थल सेनाध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने के बाद दिल्ली के ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक कॉम्प्लेक्स में जनरल धीरज सेठ को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस मौके पर एक बेहद भावुक और गौरवशाली पल भी सामने आया जब सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने अपने सेवानिवृत्त पिता लेफ्टिनेंट जनरल केएम सेठ को सैल्यूट किया। सिर्फ इतना ही नहीं, देश सेवा में समर्पित इस परिवार की गरिमा तब और बढ़ गई जब सेना प्रमुख को उनके सगे छोटे भाई रियर एडमिरल रवनिश सेठ ने भी सलामी दी। यह नजारा भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास में अनुशासन और पारिवारिक गर्व का एक अद्भुत उदाहरण बन गया है।
कार्यभार संभालने के बाद मीडिया से बात करते हुए जनरल धीरज सेठ ने साफ किया कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सेना का आधुनिकीकरण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शक मंत्र 'JAI' (Jointness, Atmanirbharta, Innovation) को आधार बनाकर अपनी प्राथमिकताओं के लिए एक विशेष एक्रोनिम 'VIJAY' जारी किया:
V (Vigilance and Readiness): सीमाओं पर निरंतर सतर्कता और हर खतरे से निपटने के लिए हाई आपरेशनल रेडीनेस।
I (Innovation and Transformation): युद्ध के बदलते तौर-तरीकों के अनुसार नए नीतिगत और तकनीकी समाधान।
J (Jointness and Integration): एयरफोर्स और नेवी के साथ पूरा तालमेल, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करेगा।
A (Aatmanirbharta): स्वदेशी तकनीकों के दम पर देश के भीतर ही सेना को आत्मनिर्भर बनाना और घरेलू हथियारों से युद्ध जीतना।
Y (Yoddha First): सेना प्रमुख के अनुसार एक नए अग्निवीर से लेकर सबसे वरिष्ठ पूर्व सैनिक (Veteran) तक हर कोई एक योद्धा है। सैनिकों की ट्रेनिंग, वीर नारियों का कल्याण और पूर्व सैनिकों का सशक्तिकरण उनकी सबसे बड़ी ताकत और प्राथमिकता रहेगी।