
सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने राजस्थान के आगामी पंचायत राज और नगर निकाय चुनावों में पूरी ताकत के साथ उतरने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। राज्य में अब तक मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच ही द्विपक्षीय मुकाबला देखने को मिलता रहा है। यह पहला मौका होगा जब AIMIM राजस्थान में जमीनी स्तर पर पंचायत और नगरीय चुनावों में अपने आधिकारिक और समर्थित उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर किस्मत आजमाएगी।
AIMIM राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष जमील खान ने बीते शनिवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी से मुलाकात कर राजस्थान के राजनीतिक हालात पर गहन चर्चा की थी। इस रणनीतिक बैठक में असदुद्दीन ओवैसी ने राजस्थान के आगामी निकाय और पंचायत चुनाव मजबूती से लड़ने के प्रस्ताव पर अपनी हरी झंडी दे दी।
जमील खान ने कहा कि पार्टी राजस्थान की आवाम के वास्तविक मुद्दों, स्थानीय समस्याओं और उनके हकों की पुरजोर आवाज बनकर हर चुनावी मैदान में दृढ़ता से खड़ी रहेगी।
ओवैसी से मुलाकात के तुरंत बाद रविवार को राजस्थान प्रदेश संगठन ने जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारियां तेज कर दीं। AIMIM राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष जमील खान के नेतृत्व में रविवार को प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक संपन्न हुई।
बैठक को संबोधित करते हुए जमील खान ने कहा कि आगामी नगरीय निकाय और पंचायत राज चुनाव में हमारी पार्टी पूरी सुदृढ़ता और संगठनात्मक ताकत के साथ पदार्पण करने जा रही है।
पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है। AIMIM के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट आरिफ मोहम्मद ने बैठक के बाद मीडिया को बताया कि प्रदेश नेतृत्व जल्द ही संपूर्ण राजस्थान में सघन जनसंपर्क अभियान शुरू करेगा।
इस अभियान के जरिए जिला स्तरीय संगठनात्मक नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा और कार्यकर्ताओं में चेतना व जागृति पैदा की जाएगी। पार्टी जिला और वार्ड स्तर पर जनता के बीच मजबूत पकड़ रखने वाले कार्यकर्ताओं को प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारेगी।
AIMIM के इस ऐलान के बाद राजस्थान की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में हलचल मच गई है। विशेषकर मुस्लिम बहुल और अल्पसंख्यक प्रभाव वाले इलाकों के स्थानीय निकायों में AIMIM की मौजूदगी से कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सीधी सेंधमारी की संभावना जताई जा रही है।
पार्टी का मानना है कि राजस्थान की जनता कांग्रेस और भाजपा दोनों के बारी-बारी के शासन से अलग एक नया और मजबूत राजनीतिक विकल्प चाहती है।