
राजस्थान की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब भजनलाल सरकार के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा अपनी ही सरकार में स्थानीय प्रशासन के खिलाफ अलवर नगर निगम के सामने धरने पर बैठ गए। मामला वाल्मीकि समाज के सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति पत्र वितरण से जुड़ा हुआ था। मंत्री संजय शर्मा का आरोप था कि जिला कलेक्टर और नगर निगम प्रशासन लगातार इस मामले में टालमटोल कर रहे हैं। इस घटनाक्रम के सामने आते ही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर जोरदार हमला बोला है।
गहलोत ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा कि जब कैबिनेट स्तर का मंत्री अपने ही जिले में जायज काम के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर है, तो इससे बड़ा प्रशासनिक निकम्मापन और कुछ नहीं हो सकता।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की अफसरशाही और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा राज में मंत्रियों की कोई हैसियत नहीं रह गई है। गहलोत ने लिखा कि मंत्री संजय शर्मा ने जिला कलेक्टर से बात की, लेकिन इसके बावजूद अफसरशाही ने अपने ही मंत्री की एक न सुनी। इससे साफ साबित होता है कि भाजपा राज में सरकार जन प्रतिनिधियों के बजाय बेलगाम अफसरों के इशारे पर चल रही है।'
पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री सिर्फ 'रबर स्टैंप' बनकर रह गए हैं। जब खुद मंत्री ही व्यवस्था के आगे बेबस और असहाय नजर आ रहे हैं, तो गरीब सफाई कर्मचारियों और आम जनता की फरियाद कौन सुनेगा?
गहलोत ने इसे भाजपा सरकार के लिए सबसे बड़ी शर्मिंदगी करार देते हुए कहा कि अपने ही मंत्री को धरना देना पड़े, यह सुशासन का मॉडल नहीं है। यह इस बात की खुली स्वीकारोक्ति है कि राज्य का प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह भ्रष्ट और बेलगाम हो चुका है।
अलवर नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाने थे। वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि लंबे समय से नियुक्ति पत्र देने की मांग कर रहे थे। आरोप है कि जिला प्रशासन और नगर निगम आयुक्त द्वारा मामले को लगातार लटकाया जा रहा था।
जब अधिकारियों ने मंत्री के हस्तक्षेप के बाद भी सुनवाई नहीं की, तो मंत्री संजय शर्मा खुद सफाई कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गए। मंत्री ने कहा कि जब तक योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र नहीं मिल जाते, वे धरना स्थल से नहीं उठेंगे। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को भी दी है।