सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बड़ा बयान आया है। गहलोत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया है वह सभी को मानना है।
जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट का कानूनी निपटारा करते हुए बुधवार को विधानसभा में बहुमत परीक्षण कराने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति एन वी रमन, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की विशेष पीठ ने अपने आदेश में कहा कि कल प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के बाद शाम पांच बजे तक विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी। उसके बाद कल ही बहुमत परीक्षण किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बड़ा बयान आया है। गहलोत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया है वह सभी को मानना है। अदालत ने कल फ्लोर टेस्ट करने को कहा है। सब लोग उसका इंतजार कीजिए। रात के अंधेरे में जो कुछ किया गया उसे देश कभी नहीं भूलेगा। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
गहलोत ने कहा कि ऐसा आज तक इतिहास में कभी नहीं हुआ कि कब तो गवर्नर ने रात को रिकमेंड किया। कब केबिनेट की मीटिंग हुई या नहीं हुई। मैंने सुना है कि प्रधानमंत्री ने अपना विशेषाधिकार काम में लिया और राष्ट्रपति को रिकमेंड कर दिया। राष्ट्रपति ने कब साइन किए देश को पता नहीं। सुबह 5:47 पर राष्ट्रपति शासन समाप्त कर दिया गया और शपथ दिला दी गई।
यह तमाशा जो हुआ वह देश नहीं पूरी दुनिया देख रही है। इससे हमारे देश की प्रतिष्ठा गिरी है। सीएम ने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं अब न्याय मिलेगा और आप खुद देखेंगे कल इनको शिकस्त मिलेगी। इनके सारे हथकंडे फेल होंगे। हॉर्स ट्रेडिंग की इनकी जो कल्पना थी, जो सपना था वह चकनाचूर हो जाएगा।
गहलोत ने कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। जिस तरह से उन्होंने बीजेपी के दबाव में, सरकार के दबाव में, प्रधानमंत्री और अमित शाह के दबाव में जो काम किया है। ऐसे व्यक्ति को राज्यपाल पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है।