
जयपुर . हाईकोर्ट ने आपराधिक अवमानना के मामले में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और विधायक अशोक परनामी का जवाब नहीं आने पर गुरुवार सुबह नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने दोपहर बाद परनामी के हाजिर होने पर टिप्पणी की कि सत्ता का नशा दिमाग खराब कर देता है। यदि गलती हुई तो बिना शर्त माफी पेश की जा सकती थी। कोर्ट ने याचिका पर जवाब के लिए एक दिन का समय देते हुए शुक्रवार तक सुनवाई टाल दी।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की बैंच ने गुरुवार को इस मामले में सुनवाई की। गुरुवार सुबह परनामी के उपस्थित नहीं होने पर नाराजगी जाहिर करते हुए दोपहर दो बजे उन्हें पेश होने का निर्देश दिया। हाजिर नहीं होने पर गिरफ्तारी वारंट से तलब करने की चेतावनी दी। इस दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि परनामी ने कोर्ट की अवमानना की है। यदि वह कोर्ट की इतनी इज्जत करते हैं तो कोर्ट को भी उनकी खातिरदारी करनी होगी। इसके चंद घंटे बाद परनामी कोर्ट में हाजिर हो गए और अदालत की अवमानना पर गलती स्वीकार करते हुए माफ करने का आग्रह किया।
इस दौरान दोपहर दो बजे परनामी महाधिवक्ता एनएम लोढ़ा, अधिवक्ता राजेश कपूर, महेन्द्र शाह और आनंद शर्मा के साथ कोर्ट में पेश हुए। परनामी के वकीलों ने जवाब के लिए समय मांगा तो कोर्ट ने कहा कि एक महीने पहले ही नोटिस हो चुके हैं, अब तक चाहते तो जवाब दे देते। यदि आपका मुवक्किल पार्टी अध्यक्ष है तो क्या वह हाईकोर्ट को खरीद लेगा? आप चाहते हैं कि आप मनमानी करते रहें और कोर्ट चुपचाप बैठा रहे? परनामी ने कहा कि वह कोर्ट का सम्मान करते हैं।