
अपराधियों के खिलाफ अपनी कड़क कार्यशैली से 'लेडी सिंघम' की पहचान रखने वाली भरतपुर रेंज की पुलिस महानिरीक्षक डॉ. प्रीति चन्द्रा एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल, डॉ चंद्रा ने अब भरतपुर रेंज में नशे के काले कारोबार और ड्रग माफियाओं के खिलाफ सीधी जंग छेड़ दी है। राजस्थान में तेजी से फैल रहे नशे के जाल को पूरी तरह से ध्वस्त करने के लिए उन्होंने एक नया एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसे ‘ड्रग्स वॉरियर्स योजना’ (Drugs Warriors Scheme) नाम दिया गया है।
इस योजना के तहत अब पुलिस अकेले नहीं लड़ेगी, बल्कि समाज और स्थानीय युवाओं की सीधी भागीदारी से नशे के सौदागरों की हर एक चाल को बेनकाब किया जाएगा।
डॉ. प्रीति चन्द्रा के इस नए एक्शन प्लान की सबसे बड़ी ताकत स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाला मजबूत सूचना तंत्र है।
हर थाने से युवाओं का चयन: रेंज के प्रत्येक थाना क्षेत्र में गठित यूथ कम्युनिटी लाइजन ग्रुप (YCLG) के सक्रिय और नशामुक्त सदस्यों में से 1 से 2 समर्पित युवाओं को 'ड्रग वॉरियर' चुना जाएगा।
बीट कांस्टेबल से टैगिंग: इन वॉरियर्स को सीधे संबंधित बीट कांस्टेबल से जोड़ा जाएगा। ये वॉरियर्स तस्करों, अवैध सप्लायर्स और ड्रग भंडारण की गुप्त जानकारी तुरंत पुलिस तक पहुंचाएंगे।
गोपनीयता और सुरक्षा: वॉरियर्स की भूमिका पूरी तरह स्वैच्छिक होगी और उन पर कोई कानूनी या पुलिसिया दायित्व नहीं रहेगा। पुलिस प्राप्त सूचना का बहु-स्रोत सत्यापन कर तुरंत एक्शन लेगी।
आईजी डॉ. प्रीति चन्द्रा ने रेंज के संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान, औद्योगिक क्षेत्र और प्रमुख परिवहन मार्गों पर विशेष फोकस रहेगा, जहां नशे की खपत या सप्लाई की आशंका सबसे ज्यादा रहती है।
तस्करों पर गाज गिराने के साथ-साथ 'लेडी सिंघम' ने नशे के दलदल में फंसे युवाओं के प्रति मानवीय और सुधारात्मक दृष्टिकोण भी अपनाया है।
पुनर्वास से जोड़ना: नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों को अपराधी मानने के बजाय मरीज माना जाएगा।
काउंसलिंग व इलाज: चिकित्सा विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और नशा मुक्ति केंद्रों की मदद से उन्हें मुफ्त इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास की सुविधा दी जाएगी।
योजना के तहत लगातार जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे और बेहतरीन काम करने वाले ड्रग वॉरियर्स को खुद आईजी डॉ. प्रीति चन्द्रा की ओर से सम्मानित व प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाएगा।
डॉ. प्रीति चंद्रा राजस्थान पुलिस की चर्चित महिला IPS अधिकारियों में शामिल हैं। उनका जन्म 1979 में सीकर जिले के कूदन गांव में एक सामान्य किसान परिवार में हुआ। उनके पिता रामचंद्र सुंडा सेना से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से की और आगे जयपुर के महारानी कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की।
खास बात यह है कि उन्होंने बिना कोचिंग के अपने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास की। वर्ष 2008 में उन्होंने ऑल इंडिया 255वीं रैंक हासिल की और IPS के लिए चयनित हुईं। IPS बनने से पहले वे पत्रकारिता से भी जुड़ी रहीं और शिक्षक के रूप में काम किया।
IPS बनने के बाद प्रीति चंद्रा ने राजस्थान पुलिस में अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। फरवरी 2026 में उन्हें IG (Law & Order), राजस्थान नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे पुलिस मुख्यालय में भी महत्वपूर्ण पदों पर रही हैं।
15 जुलाई 2026 के IPS तबादला आदेश में उन्हें IG, भरतपुर रेंज नियुक्त किया गया। भरतपुर रेंज में भरतपुर, डीग, धौलपुर और करौली जिले आते हैं।
प्रीति चंद्रा की पहचान एक सख्त और फील्ड-ओरिएंटेड पुलिस अधिकारी के रूप में बताई जाती है। उनके करियर में अपराध नियंत्रण, मानव तस्करी, साइबर अपराध और संगठित अपराध जैसे मुद्दों पर काम का ज़िक्र मिलता है।
अब भरतपुर रेंज में उनकी प्राथमिकताओं में अपराध नियंत्रण, साइबर ठगी, अवैध हथियारों और नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई प्रमुख चुनौती है।
प्रीति चंद्रा की शादी IPS अधिकारी डॉ. विकास पाठक से हुई है। दोनों एक ही बैच के अधिकारी हैं।