Organ Transplant Scam: राजधानी जयपुर में ऑर्गन ट्रांसप्लांट मामले में लगातार कार्रवाई जारी है। एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ.अचल शर्मा और मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ.राजीव बगरहाड़ के इस्तीफे मंजूर कर लिए गए हैं। सीएम भजनलाल की मंजूरी मिलने के बाद चिकित्सा विभाग ने इनकी जगह डॉ.दीपक माहेश्वरी को कार्यवाहक प्रिंसिपल और डॉ.सुशील भाटी को कार्यवाहक अधीक्षक बनाया है।
Organ Transplant Scam: राजधानी जयपुर में ऑर्गन ट्रांसप्लांट मामले में लगातार कार्रवाई जारी है। एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ.अचल शर्मा और मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ.राजीव बगरहाड़ के इस्तीफे मंजूर कर लिए गए हैं। सीएम भजनलाल की मंजूरी मिलने के बाद चिकित्सा विभाग ने इनकी जगह डॉ.दीपक माहेश्वरी को कार्यवाहक प्रिंसिपल और डॉ.सुशील भाटी को कार्यवाहक अधीक्षक बनाया है। इधर, सोटो के अध्यक्ष और आरयूएचएस के वीसी डॉ.सुधीर भंडारी पर कार्रवाई की सरकार ने तैयारी कर ली है। सरकार की ओर से डॉ. सुधीर भंडारी के कारनामों की फाइल अब राज भवन भेजी जा रही है। इसके बाद डॉ. भंडारी पर गाज गिरना तय है।
वीआरएस के बाद ट्रांसप्लांट प्रोग्राम से नहीं जुड़ा: डॉ.भंडारी
इस मामले में डॉ. भंडारी का कहना है कि 4 जुलाई 2022 को वीआरएस लेने के बाद किसी भी तरह के ट्रांसप्लांट प्रोग्राम से नहीं जुड़ा। इस प्रोग्राम में वीसी की भूमिका नहीं होती है। एसएमएस प्राचार्य सोटो के नॉमिनल हेड होते हैं। सोटो की देखरेख में कैडेवर ट्रांसप्लांट होता है। जिसके लिए राजस्थान को उत्कृष्ट अवॉर्ड तक मिले हैं। एसएमएस छोड़ने से पहले कन्वीनर अधीक्षक द्वारा एसएमएस में हर हफ्ते नियमित पेशेंट ऑथराइजेशन मीटिंग होती थी। जिसमें 100 प्रतिशत नियमों को लागू किया जाता था।
साल 2020 से चल रहा है मामला: चिकित्सा मंत्री डॉ.खींवसर
वही, इस मामले में चिकित्सा मंत्री डॉ.गजेंद्र सिंह खींवसर का कहना है कि फर्जी एनओसी का मामला साल 2020 से चल रहा है। डॉ.भंडारी प्रिंसिपल पद पर रहने के बाद भी सोटो को आरयूएचएस से ही चला रहे थे। डॉ. भंडारी का दस्तावेजों के मिसयूज होने का बयान पूरी तरीके से गलत है, क्योंकि सरकार के पास उनके खिलाफ सारे सबूत हैं। जिसमें सोटो अध्यक्ष के तौर पर कार्यक्रमों में वह शामिल हुए और सर्टिफिकेट भी बांटे। अब उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट राज भवन भेजी जाएगी।