Bisalpur Dam news : बीसलपुर बांध का गेज शुक्रवार सुबह 8 बजे 315.49 आर एल मीटर दर्ज किया गया। ऐसे में बांध लबालब होने से मात्र 01 सेंटीमीटर ही खाली रह गया है।
Bisalpur Dam: जयपुर। राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के करोड़ों लोगों के कंठतर करने वाले बीसलपुर बांध से सुबह-सुबह बड़ी खुशखबरी आ रही है। बीसलपुर बांध में लगातार पानी की आवक जारी है। ऐसे में आज बांध के गेट खोले जाने है। इसके लिए कुछ ही देर में आसपास के क्षेत्र में हूटर की आवाज गूंज उठेगी। प्रशासन ने बीसलपुर बांध के गेट खुलने पर सर्तकता रखने के निर्देश दिए है। इस बार सातवीं मर्तबा बांध छलकने के करीब पहुंचने से लोगों में खुशी का माहौल है।
बीसलपुर बांध का गेज शुक्रवार सुबह 8 बजे 315.49 आर एल मीटर दर्ज किया गया। ऐसे में बांध लबालब होने से मात्र 01 सेंटीमीटर ही खाली रह गया है। माना जा रहा है कि आने वाले 2 घंटे में बांध पूरी तरह लबालब हो जाएगा और बांध के गेट सुबह 9 से 10 बजे के बीच खोले जा सकते है। गेट संख्या 8 व 9 से पानी की निकासी की जाएगी। खास बात ये है कि बीसलपुर बांध के इतिहास में सातवीं बार ऐसा होगा।
बीसलपुर बांध में जारी आवक पानी निकासी के लिए गेट खोले जाने है। इसको लेकर प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। उपखंड अधिकारी मनोज कुमार मीणा ने अधिकारियों को आवश्यक सर्तकता रखने के निर्देश दिए गए हैं। बांध के डाउनस्ट्रीम में बनास नदी में से होकर आवागमन के रास्ते राजमहल से बोटून्दा, बंथली से कंवरावास, रावता माताजी, राजमहल से संथली, डेम के मुख्य मार्ग पर सेप्टीवॉल के पास व अन्य नदी से होकर गुजरने वाले मार्गों पर सहायक अभियंता सानिवि चेतावनी बोर्ड व बेरिकेटींग लगाए गए है। साथ ही विकास अधिकारी संबंधित ग्राम पंचायतों में लोगों को जागरुक कर रहे।
बीसलपुर बांध वर्ष 1996 में बनकर तैयार हुआ था। बांध में पहली बार साल 2004 में पानी रोका गया था और पहली बार में ही यह 18 अगस्त को छलक गया था। इसके बाद बांध 25 अगस्त 2006, 19 अगस्त 2014, 10 अगस्त 2016, 19 अगस्त 2019 और 26 अगस्त 2022 को छलका था। लेकिन, इस बार बांध के सितंबर में लबालब हुआ है।
बीसलपुर बांध का कुल जलभराव 315.50 आर एल मीटर है। जिसमें 38.703 टीएमसी का जलभराव होता है। बांध के पूर्ण जलभराव में 21 हजार 300 हेक्टेयर भूमि जलमग्न होती है। जिसमें कुल 68 गांव डूब में आते हैं। जिसमें 25 गांव पूर्णतया डूब जाते हैं वही 43 गांव आंशिक रूप से डूबते हैं जिनकी सिर्फ कृषि भूमि ही डूबती है। बांध बनने के बाद इस बार पूर्ण जलभराव होकर सातवीं बार छलकेगा।