जयपुर

कांग्रेस को धरियावद, भाजपा को वल्लभनगर में बनानी होगी मजबूत रणनीति

  - धरियावद में कांग्रेस लगातार दो बार हार चुकी है विधानसभा चुनाव- वल्लभनगर में 2003 के बाद नहीं जीत पाया भाजपा उम्मीदवार

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कांग्रेस को धरियावद, भाजपा को वल्लभनगर में बनानी होगी मजबूत रणनीति

अरविन्द सिंह शक्तावत/जयपुर । प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा के साथ ही भाजपा-कांग्रेस टिकट चयन को लेकर मंथन कर रहे हैं। नामांकन की अंतिम तिथि आठ अक्टूबर है, लेकिन अभी तक भी दोनो ही दलों ने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। कांग्रेस को धरियावद और भाजपा को वल्लभनगर विधानसभा सीट पर टिकट चयन में खासा सोच विचार करना पड़ रहा है। भाजपा में धरियावद में टिकट चयन को लेकर उतनी दिक्कत नहीं है, जितनी वल्लभनगर में है। यहां पार्टी लम्बे समय से जीती नहीं है। इसी तरह से धरियावद सीट पर टिकट चयन से ज्यादा चुनौती कांग्रेस के लिए जीत हासिल करना है। यहां दो बार से भाजपा का ही विधायक बनता आ रहा है।

कहां क्या स्थिति

धरियावद- यहां भाजपा की तरफ से तो गौतम लाल मीणा के पुत्र कन्हैया लाल मीणा का नाम करीब-करीब फाइनल ही बताया जा रहा है। गौतम लाल मीणा लगातार दो बार चुनाव जीत चुके हैं। इसलिए पार्टी उनके पुत्र को ही टिकट देना चाहती है। कन्हैया लाल मीणा प्रधान भी रह चुके हैं। कांग्रेस में यहां सबसे प्रमुख दावेदारी नागराज मीणा की है। उनको कांग्रेस लगातार टिकट देती आ रही है, लेकिन 2008 के बाद वे चुनाव नहीं जीत पा रहे हैं। ऐसे में यहां कांग्रेस जीत की रणनीति बनाने में जुटी हुई है और इस रणनीति के तहत ही टिकट देने की तैयारी की जा रही है। 2008 में नागराज यहां 66 प्रतिशत वोट लेकर जीते थे, लेकिन इसके बाद वे नहीं जीत सके। गौतम लाल मीणा 2013 मे भी विधायक बने और इसके बाद 2018 में उनको 2013 से भी ज्यादा वोट मिले। 2018 में सत्ता विरोधी लहर के बावजूद भाजपा विधायक गौतम लाल मीणा को 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले।

वल्लभनगर- यह सीट कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के लिए परेशानी वाली बनी हुई है। कांग्रेस तो यहां स्व विधायक गजेन्द्र सिंह शक्तावत के परिवार में टिकट देने का मन बना चुकी है, लेकिन भाजपा कुछ भी तय नहीं कर पा रही है। पार्टी का एक धड़ा रणधीर सिंह भींडर को टिकट देना चाहता है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया इसके पक्ष में नहीं है। 2003 में यहां से भाजपा का आखिरी बार विधायक बना था और वो भी भींडर ही बने थे। इसके बाद भींडर को पार्टी ने टिकट नहीं दिया।

इसके बाद पार्टी यहां 2008 से ही चुनाव नहीं जीत पा रही है। 2008 से लेकर 2018 तक तीन विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और हर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी यहां तीसरे नम्बर पर ही रह रहा है। सूत्रों के अनुसार भींडर को पार्टी में लाने के लिए प्रयास अभी भी जारी हैं, लेकिन उनको टिकट दिया जाएगा। इस पर फैसला नहीं हो पा रहा है, जिस वजह से भींडर को लेकर मजबूत निर्णय नहीं हो पा रहा है। पार्टी यहां यह भी विचार कर रही है कि भींडर नहीं तो किसी अन्य राजपूत को टिकट दिया जाए, जिससे राजपूत वोट बंट सके।

बड़े नेताओं के बीच टिकट चयन पर मंथन जारी

कांग्रेस में टिकट चयन को लेकर प्रभारियों समेत प्रमुख नेताओं से चर्चा की जा चुकी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ही टिकट को लेकर अंतिम चर्चा करेंगे। इसके बाद आलाकमान को राय बताई जाएगी। इसी तरह भाजपा में भी कोर कमेटी के प्रमुख सदस्यों के साथ चर्चा हो चुकी है। प्रभारियों से भी चर्चा जारी है। आज या कल दिल्ली नाम भेज दिए जाएंगे। इसके बाद प्रत्याशियों की घोषणा हो जाएगी।

उपचुनाव: मुख्यमंत्री करेंगे दो सभाएं
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दो सीटों पर हो रहे उपचुनाव में दो सभाएं करेंगे। कार्यक्रम के अनुसार वे शुक्रवार को प्रात: 09.15 बजे जयपुर से वल्लभनगर पहुंचेंगे और जनसभा करेंगे। इसके बाद वे दोपहर एक बजे धरियावद पहुंचकर जनसभा को सम्बोधित करेंगे। मुख्यमंत्री शाम को वापस जयपुर पहुंचेंगे।

Updated on:
06 Oct 2021 09:42 am
Published on:
06 Oct 2021 09:18 am
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