राजस्थान हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने प्रदेश के बाहर की सम्पत्ति के हस्तांतरण पर भी स्टांप ड्यूटी मांगने के स्थानीय प्रशासन के नोटिस और उसे सही ठहराने वाले हाईकोर्ट की एकलपीठ के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के बाहर हुए संपत्ति हस्तांतरण के लिए ही यहां स्टांप ड्यूटी की मांग नहीं की जा सकती।
राजस्थान हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने प्रदेश के बाहर की सम्पत्ति के हस्तांतरण पर भी स्टांप ड्यूटी मांगने के स्थानीय प्रशासन के नोटिस और उसे सही ठहराने वाले हाईकोर्ट की एकलपीठ के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के बाहर हुए संपत्ति हस्तांतरण के लिए ही यहां स्टांप ड्यूटी की मांग नहीं की जा सकती।
न्यायाधीश एम एम श्रीवास्तव व न्यायाधीश बीरेंद्र कुमार की खंडपीठ ने हाल ही हिमाचल फ्यूचरिस्टिक कम्यूनिकेशन लिमिटेड की अपील पर यह आदेश दिया। कोर्ट ने इस मामले में जयपुर स्थित पंजीयन-मुद्रांक विभाग के स्थानीय अधिकारियों को आदेश दिया है कि जयपुर स्थित सम्पत्तियों के लिए बाजार मूल्य के अनुसार नए सिरे से स्टांप ड्यूटी तय की जाए।
दो कंपनियों के विलय के दौरान उनकी राजस्थान व हिमाचल प्रदेश स्थित सम्पत्तियों का अंतरण हुआ। स्थानीय प्रशासन ने इस अंतरण के संबंध में हिमाचल प्रदेश की सम्पत्तियों पर स्टांप ड्यूटी की मांग की। अपीलार्थी कंपनी ने स्थानीय प्रशासन के मांगपत्र को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट की एकलपीठ ने राहत देने के बजाय कंपनी की याचिका ही खारिज कर दी। एकलपीठ के इसी आदेश को अपील में चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने अपील निस्तारित करते हुए कहा कि कंपनियों के विलय के दौरान उनके शेयरों का हस्तांतरण राजस्थान में नहीं हुआ। ऐसे में समझौता पत्र में शामिल सभी संपतियों पर यहां स्टाम्प ड्यूटी की मांग नहीं की जा सकती है। कंपनी केवल राजस्थान स्थित संपत्तियों के बाजार मूल्य पर स्टांप शुल्क चुकाने के लिए उत्तरदायी है।
यह था मामला
याचिकाकर्ता कंपनी व सनविजन इंजीनियरिंग कंपनी के विलय का करार हुआ। इसके तहत सनविजन इंजीनियरिंग कंपनी के जयपुर स्थित 14 भूखंडों को याचिकाकर्ता कंपनी के नाम दर्ज किया जाना था। इसके लिए कंपनी ने जयपुर विकास प्राधिकरण में आवेदन किया। प्राधिकरण ने शेयर सहित संपूर्ण दस्तावेज पर स्टांप ड्यूटी का आकलन कर कंपनी से 25 करोड़ रुपए स्टांप ड्यूटी मांग ली। इसके खिलाफ दायर याचिका को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने खारिज कर दिया।