हलवाइयों की मिठाइयों के लिए त्योहारी मांग से स्थानीय किराना-मेवा बाजार में काजू टुकड़ी में 15 से 20 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ड्राई फ्रूट मार्केट में काजू टुकड़ी के थोक दाम 640 रुपए प्रति किलो महंगे बोले जा रहे हैं। हालांकि साबुत काजू में कोई फेरबदल नहीं हुआ है।
हलवाइयों की मिठाइयों के लिए त्योहारी मांग से स्थानीय किराना-मेवा बाजार में काजू टुकड़ी में 15 से 20 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ड्राई फ्रूट मार्केट में काजू टुकड़ी के थोक दाम 640 रुपए प्रति किलो महंगे बोले जा रहे हैं। हालांकि साबुत काजू में कोई फेरबदल नहीं हुआ है। गौरतलब है कि भारत दुनिया में 23 फीसदी से अधिक काजू का उत्पादन करता है। वर्तमान में केरल में सबसे ज्यादा काजू का उत्पादन होता है। देश का 28.09 प्रतिशत काजू का उत्पादन यहीं होता है। वहीं, महाराष्ट्र 20.31 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, ओडीशा, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी काजू की खेती पहले से होती रही है। राजधानी कृषि उपज मंडी कूकरखेड़ा स्थित माया ट्रेडिंग कंपनी के हितेश गोयल ने बताया कि इन दिनों साबुत काजू की कीमतें 580 से 1000 रुपए प्रति किलो तक चल रही हैं। बाजार में बेहतर मालों की डिमांड ज्यादा है। ज्ञात हो केरल के कोल्लम एवं मैंगलौर से ज्यादातर काजू निर्यात होता है। इन दिनों निर्यात मांग अपेक्षाकृत कमजोर चल रही है। यही कारण है कि घरेलू बाजार में साबुत काजू की उपलब्धता बढ़ गई है। परिणामस्वरूप साबुत काजू की कीमतें त्योहारी मांग होने के बावजूद ज्यादा तेज नहीं हुई।
भारत काजू का सबसे बड़ा प्रोसेसर देश
भारत दुनिया में काजू का सबसे बड़ा प्रोसेसर देश है। यहां काजू का उत्पादन भी बंपर होता है, मगर दुनिया में दूसरा स्थान है। कच्चा काजू पैदा करने में भारत दूसरे स्थान पर है। पहले पर आइवरी कोस्ट का नाम आता है। काजू के प्रोसेसिंग में भारत का पहला स्थान है। देश में पश्चिमी और पूर्वी तटीय इलाकों में इसकी पैदावार सबसे ज्यादा होती है। प्रोसेसिंग के साथ-साथ भारत काजू की खपत में भी पहला स्थान रखता है। एक अधिकारिक अनुमान के मुताबिक भारत में वर्ष 2020-21 में काजू का उत्पादन 6 लाख 91 हजार टन हुआ, जबकि उससे पहले वर्ष में 7 लाख 42 हजार टन काजू की पैदावार हुई थी।