
जयपुर। सेंट्रल जेल में बंद बहरोड़ के पूर्व विधायक बलजीत यादव के पास तलाशी के दौरान मोबाइल फोन मिलने से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। जेल प्रशासन की ओर से वार्ड नंबर-5 में चलाए गए सघन तलाशी अभियान के दौरान पूर्व विधायक के पास से मोबाइल बरामद हुआ। बताया जा रहा है कि उन्होंने फोन को जमीन पर बिछाए गए कंबल के अंदर छिपा रखा था।
जेल प्रशासन के अनुसार बुधवार दोपहर करीब 12 बजे वार्ड नंबर-5 में बंदियों की तलाशी ली जा रही थी। इसी दौरान विचाराधीन बंदी बलजीत यादव के पास एक मोबाइल फोन मिला। फोन को जब्त करने के बाद जेल प्रशासन ने इसकी सूचना पुलिस को दी। जेल प्रहरी विष्णु की रिपोर्ट पर लालकोठी थाने में मामला दर्ज कराया गया है। जब्त मोबाइल फोन पुलिस को सौंप दिया गया है।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि मोबाइल फोन जेल के अंदर कैसे पहुंचा। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि जेल में रहने के दौरान पूर्व विधायक ने मोबाइल के जरिए किन-किन लोगों से संपर्क किया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में बलजीत यादव से पूछताछ की जाएगी। उनके मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी खंगाली जा सकती है, ताकि जेल के भीतर से किए गए संपर्कों की जानकारी सामने आ सके।
जयपुर सेंट्रल जेल में पिछले कुछ समय से लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को भी सर्च ऑपरेशन के दौरान आठ बंदियों के पास से मोबाइल फोन बरामद किए गए। इससे पहले भी जेल प्रशासन ने एक अभियान के दौरान 13 मोबाइल फोन जब्त किए थे और संबंधित बंदियों के खिलाफ पुलिस में मामले दर्ज करवाए थे।
पूर्व विधायक बलजीत यादव स्थानीय एमएलए फंड में कथित अनियमितता और करीब 3.72 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में जेल में बंद हैं। आरोप है कि बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के 32 सरकारी स्कूलों के लिए बैडमिंटन और क्रिकेट किट की खरीद में सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार खेल सामग्री की खरीद कथित तौर पर निर्धारित कीमत से कई गुना अधिक दर पर की गई, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। मामले में कुछ फर्मों के संचालकों और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
ACB ने 12 दिसंबर 2024 को बलजीत यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मामले की जांच शुरू की। ED ने 3 फरवरी 2026 को बलजीत यादव को गिरफ्तार किया था। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद 7 फरवरी को उन्हें जयपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया था।
अब जेल में मोबाइल मिलने के मामले ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि फोन उन्हें किसने उपलब्ध कराया और इसका इस्तेमाल किन लोगों से संपर्क के लिए किया जा रहा था।