
जयपुर। सदी का सबसे बड़ा चंद्रगहण शुक्रवार रात 11:54 बजे शुरू हुआ। गृहण काल शनिवार तड़के 3:49 बजे तक रहा। इस खगोलीय घटना को देखने के लिए शहरवासियों में खासा उत्साह रहा। कुछ लोगों ने इसे अपने स्तर पर तो कुछ ने बिड़ला तारामंडल प्रांगण में दूरबीन से देखा।
तारामंडल के सहायक निदेशक संदीप भट्टाचार्य ने बताया कि इस दौरान पृथ्वी के नजदीक मंगल और चंद्रमा आ गए। हालांकि इससे पहले शुक्रवार दोपहर 2.54 बजे से सूतक लग जाने से दिन भर भक्ति-भाव का दौर चला। चंद्रग्रहण का असर शहर के कई मंदिरों में देखने को मिला।
कुछेक मंदिरों के सूतक लगने के साथ ही मंदिरों के पट बंद हो गए। वही शहर स्थित आराध्या गोविंददेवजी के पट ग्रहण काल में खुले रहे। इस दौरान हरिनाम संकीर्तन होता रहा। 28 जुलाई को मंगला झांकी के दर्शन भक्त नहीं कर सकेंगे।
सरस निकुंज में सूतक लगने से पूर्व दोनों समय की ठाकुर जी सेवा पूर्ण करके पट मंगल कर दिए गए। शनिवार को वेदव्यास जी महाराज की पीठ का पूजन विधिवत रूप से सुबह-8 बजे किया गया।