
जयपुर/जोधपुर। मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार मंगलवार को अपने गृह नगर जोधपुर पहुंचे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यहां घंटाघर में धन्यवाद सभा को संबोधित करते हुए चेतावनी भरे लहजे में भाजपा नेताओं के जेल भरो आंदोलन का जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि महज सवा महीने में ही सरकार ने कई निर्णय लिए, फिर किस बात का धरना दे रहे हैं। यदि जेल में डाल दिया तो बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। गहलोत ने कहा कि भाजपा के लोग सोच-समझ कर ही सड़कों पर उतरें। उन्होंने सवा महीने में कांग्रेस सरकार की ओर से किए गए निर्णय के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बेरोजगारी भत्ता 600 से बढ़ाकर 3500 करने पर शीघ्र ही निर्णय किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सर्किट हाउस परिसर में 14 पाक विस्थापितों को नागरिकता प्रमाण-पत्र भी वितरित किए। सीएम ने फिर वही नारा दोहराया-मैं थांसू दूर नहीं...। जब सभा चल रही थी तो अजान की आवाज आई। इस पर गहलोत ने अजान पूरी होने तक संबोधन रोक दिया। गहलोत ने दो बार गार्ड ऑफ ऑनर लेने से मना कर दिया। इसके लिए पुलिस कमिश्नर ने जवानों से रिहर्सल करवाई।
गहलोत ने जयपुर पूर्व राजघराने की गायत्री देवी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने जयपुर में अंतिम सांस लेने की इच्छा जाहिर की थी। इसके लिए उनको अंतिम समय में इंग्लैंड से जयपुर लाया गया। ऐसे ही मेरी भी इच्छा है कि जब अंतिम सांस निकले तो जोधपुर में आप लोगों के बीच रहूं। बच्चे मुझसे काफी प्रेम करते हैं। जहां भी देखते हैं हाथ मिलाने आ जाते हैं।
40 साल से यह सिलसिला चल रहा है। पहले जब दिग्गज कांग्रेसी नेता मेरे साथ घूमते थे तो कहते थे गहलोत भविष्य की राजनीति कर रहा है। बच्चे जो बड़े होंगे तो इसको वोट देंगे। यह सिलसिला आज भी जारी है। उन्होंने पूर्व मुख्यंत्री वसुंधरा राजे पर आरोप लगाया कि उन्हें मारवाड़ व जोधपुर की उपेक्षा करने में आनन्द की अनुभूति होती थी। वे बदले की भावना रखती थी। इसीलिए पूर्व विधायक जुगल काबरा, पूर्व जेडीए चेयरमैन राजेन्द्र सोलंकी के विरुद्ध कार्रवाई की।