
- एक साल में सिर्फ 33 माइनिंग प्लान मंजूर, 15 आवेदन अब भी आइबीएम में लंबित- बैंक गारंटी और तकनीकी अड़चनों ने बढ़ाई लीजधारकों की परेशानी
अनिल सिंह चौहान
भीलवाड़ा. प्रदेश में कृषि के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक रोजगार देने वाले खनन क्षेत्र पर बड़ा संकट गहरा गया है। केंद्र सरकार के नए आदेश और भारतीय खान ब्यूरो (आइबीएम) में जारी धीमी कार्यप्रणाली के चलते प्रदेश की लगभग 5500 खदानों पर 1 अक्टूबर के बाद ताले लटकने की नौबत आ गई है। यदि समय रहते इन खनन पट्टों की खनन योजनाओं (माइनिंग प्लान) का अनुमोदन नहीं हुआ, तो प्रदेश को न केवल भारी राजस्व की चपत लगेगी, बल्कि लाखों लोगों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट भी खड़ा हो जाएगा।
यह है पूरा मामला
केंद्र सरकार ने 20 फरवरी 2025 को अधिसूचना जारी कर अप्रधान खनिज क्वार्ट्ज, फेल्सपार, अभ्रक व बैराइट्स को प्रधान खनिज की श्रेणी में शामिल किया था। आदेश के बाद सबसे अधिक प्रभाव राजस्थान में पड़ा। क्योंकि सबसे अधिक 5500 खदानें प्रदेश में हैं। केंद्र सरकार ने पहले 30 जून 2025 तक माइनिंग प्लान को खान निदेशालय स्तर पर स्वीकृत कराने के आदेश दिए थे। लेकिन केंद्र सरकार ने 1 मई 2025 को एक आदेश जारी कर सभी लीजधारकों को 1 अक्टूबर 2026 से पूर्व अपने खनन पट्टों की खनन योजनाओं का अनुमोदन भारतीय खान ब्यूरो अजमेर (आइबीएम) से करवाना अनिवार्य कर दिया। जमीनी स्तर पर लीजधारकों की स्थितियां बेहद विकट हैं। लीजधारकों को माइनिंग प्लान तैयार करने के लिए न तो पर्याप्त क्वालिफाइड व्यक्ति (माइनिंग इंजीनियर) मिल रहे और न ही आइबीएम से इन योजनाओं का अनुमोदन हो पा रहा है। वहीं बैंक गारंटी भी बड़ी समस्या है।
सुस्त कार्यप्रणाली: एक साल में सिर्फ 33 को मंजूरी, 11 रिजेक्ट
अनुमोदन की रफ्तार का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 1 जुलाई 2025 से 4 अगस्त 2026 तक खनिज बैराइट्स, क्वार्ट्ज, फेल्सपार एवं अभ्रक के 104 खनन पट्टों की योजनाओं के लिए आइबीएम में आवेदन किए गए। इनमें से 33 माइनिंग प्लान को मंजूरी मिली है, 23 को रीफ्यूज कर दिया गया। 11 प्लान को तकनीकी कमियों के चलते खारिज कर दिया और 22 को लीजधारकों ने पुन: विड्रो कर लिया। जबकि आइबीएम के पास अब भी 15 आवेदन लम्बित हैं।
बैंक गारंटी बड़ी समस्या
लीजधारकों के लिए 5 लाख रुपए प्रति हैक्टेयर की बैंक गारंटी जमा कराना बड़ी समस्या है। इसके चलते लीजधारक आवेदन तो कर रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। इसी कारण आइबीएम की ओर से आवेदक को निरस्त किया जा रहा है।
- राधा वल्लभ माहेश्वरी, सचिव, राजपूताना माइन्स ओनर एसोसिएशन
श्रमिकों की जुबानी...
छह माह से मजदूरों के हालात खराब हैं। हमारे सामने रोजगार का बड़ा संकट हो गया है। काम की तलाश में भटक रहे हैं। कई खदानें पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं।
- शंकर लाल मीणा, श्रमिक रायपुर
कच्चा माल मोरबी नहीं जा रहा। सरकार के नए नियम से जो खदानें चल रही थीं वह भी अब बंद होने की स्थिति में आ गई हैं।
- चौकलाल मीणा, श्रमिक, रायपुर