जयपुर

cochlear implant:इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से महसूस कर सकते हैं आवाज को

cochlear implants: मूक-बधिर बच्चों का जीवन बदला कॉकलियर इम्प्लांट ने

2 min read
Oct 06, 2021
cochlear implants: The sound can be felt with an electronic device

cochlear implants: कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी ने सैकड़ों मूक-बधिर बच्चों को आवाज का अहसास करवाया है। ऐसे बच्चे भी अब आवाज को पहचान सकते हैं, सिर्फ इस छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से। चिकित्सा विज्ञान ने इतनी उन्नति कर ली है कि अगर छोटी उम्र में ही बच्चों की इस अक्षमता का पता चल जाता है, तो इसका उपचार संभव हो सकता है। इस बीमारी का पता लगाने के लिए एक जांच की जाती है, जिसे ध्वनि उत्सर्जन जांच कहा जाता है। इस जांच से बच्चों की सुनने की क्षमता का पता चलता है। अगर जांच में यह बहरेपन की समस्या सामने आती है तो कॉकलियर इम्पलांट सर्जरी के माध्यम से इस समस्या से मुक्ति दिलाई जा सकती है। अब ऐसे बच्चों के लिए यह नई तकनीक, नए जीवन की तरह है।

क्या होता है कॉकलियर इम्पलांट
कॉकलियर इम्प्लांट एक छोटा इलेक्ट्रोनिक डिवाइस होता है जो व्यक्ति को आवाज को महसूस करने में मदद करता है। यह उन लोगों के काम आता है जिनकी श्रवण क्षमता बहुत कम है या फिर जिनमें बहरेपन की समस्या पाई जाती है। इस डिवाइस में मुख्यरूप से दो हिस्से होते हैं। पहला हिस्सा एक माइक्रोफोन होता है, जो वातावरण से ध्वनि को प्राप्त करता है, यह कान के बाहरी हिस्से में पीछे की तरफ लगाया जाता है। इस डिवाइस के दूसरे हिस्से को सर्जरी की मदद से कान में अंदर लगाया जाता है जो इस ध्वनि को व्यक्ति को महसूस करवाने में मदद करता है।

हियरिंग एड से अलग है यह
अक्सर लोग कॉकलियर इम्पलांट और हियरिंग एड को एक ही समझते हैं, लेकिन दोनों में बहुत फर्क होता है। हियरिंग एड सिर्फ कानों तक आने वाली ध्वनि को एम्पलीफाई करता है, जिससे कम सुनने वाले व्यक्ति को ध्वनि साफ सुनाई देने लगती है। हियरिंग एड कान के डैमेज हिस्से का ही प्रयोग ध्वनि पहुंचाने के लिये करता है, जबकि कॉकलियर इम्पलांट कान के डैमेज हिस्से का प्रयोग किये बिना सीधे दिमाग के ऑडिटरी नर्व तक ध्वनि के सिग्नल पहुंचा देता है और व्यक्ति में सुनने की क्षमता पैदा हो जाती है।

स्पीच थैरेपी भी साथ में
कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी के पश्चात दो तीन वर्ष तक स्पीच थैरेपी करवायी जाने से बच्चे में बोलने की क्षमता विकसित हो जाती है। इससे बच्चा बोलने एवं सुनने में सक्षम हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों में कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी के परिणाम आशाजनक रहते हैं। यह सर्जरी फिलहाल काफी महंगी है।

Published on:
06 Oct 2021 06:00 pm
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