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जयपुर। पंजाब में उग्रवाद के खात्मे के लिए तीन दशक पहले चलाए गए बहुचर्चित ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के दौरान गिरफ्तार किए गए कथित आतंकियों को मुआवजे के भुगतान पर
राजनीति शुरू हो गई है। पंजाब सरकार ने अमृतसर की एक अदालत के आदेश पर अपने हिस्से की मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया तो अब केंद्र सरकार पर उसके हिस्से
का मुआवजा देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
जोधपुर जेल में बंद रहे थे 365 लोग
ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के दौरान पंजाब के विभिन्न हिस्सों से जून 1984 में 365 लोगों को उग्रवाद फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर राजस्थान की जोधपुर जेल में लाकर बंद किया गया था। इनमें से करीब 224 बंदियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए जेल में रखे जाने के बदले मुआवजे का दावा अमृतसर की अदालत में पेश किया था, लेकिन दावा खारिज हो गया। इसके बाद इनमें से 40 बंदियों ने अमृतसर के सत्र न्यायालय में अर्जी दायर की।
केंद्र कर रहा अपने हिस्से का मुआवजा देने से इनकार
अदालत ने पिछले साल प्रति बंदी 4 लाख रुपए और अर्जी दाखिल करने की तिथि से छह प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ मुआवजा राशि के भुगतान का आदेश दिया था। केंद्र व राज्य सरकार को आधी आधी राशि देने के आदेश दिए गए। केंद्र ने मुआवजा देने से इनकार करते हुए आदेश को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है और इस पर सम्भवत: 2 जुलाई को सुनवाई होगी।
अमृतसर सेशन कोर्ट ने दिया था मुआवजे का आदेश
लेकिन पंजाब की कांग्रेस सरकार ने अपने हिस्से की मुआवजा राशि का गुरुवार को भुगतान कर दिया। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लगभग साढ़े चार करोड़ रुपए के चैक एक समारोह में प्रदान किए। अब केंद्र पर भी हाईकोर्ट से याचिका वापस लेकर अपने हिस्से का मुआवजा अदा करने का दबाव बनाने की राजनीति शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री कैप्टन सिंह ने कहा कि वे सभी 365 कैदियों को भी केंद्र से मुआवजा दिलाने का प्रयास करेंगे।