
... लो, सचिन पायलट के लोकसभा चुनाव लड़ने को लेकर आ गया सबसे बड़ा अपडेट
... तो इस बार कांग्रेस को करना होगा त्याग!
[typography_font:14pt]राजस्थान में यदि लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र विरोधी दलों के बीच गठबंधन हो जाता है, तब इसका असर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण और सीट शेयरिंग पर झलकना तय है। ऐसे में साथी दलों से समझौते के बाद कांग्रेस को सभी 25 सीटों पर खुद की पार्टी के उम्मीदवार उतारने का मोह त्यागना पड़ सकता है।
[typography_font:14pt]सीपीआई और सीपीआईएम से समझौते के तहत राजस्थान या अन्य राज्य में सीट छोड़ी जाएंगी। वहीं प्रदेश में बीएपी के लिए उदयपुर या बांसवाड़ा और आरएलपी के लिए नागौर या अन्य कोई एक सीट छोड़ी जा सकती है।
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पिछले चुनाव में भाजपा ने छोड़ी थी एक सीट
[typography_font:14pt;" >लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान भाजपा ने एक सीट का त्याग राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के लिए किया था। तब हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन किया था। एनडीए ने नागौर सीट पर हनुमान बेनीवाल को ही उतारा था जिसमें वे जीत हासिल कर संसद तक पहुंचे थे।