आग की घटनाओं में जान जोखिम में डालकर काम करने वाले फायर फाइटर्स की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ठेके पर कार्यरत फायर फाइटर्स संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं और उनका मासिक मानदेय अब तक दस हजार रुपए से कम है। कई फायर फाइटर्स 15 साल से ठेके पर कार्यरत […]
आग की घटनाओं में जान जोखिम में डालकर काम करने वाले फायर फाइटर्स की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ठेके पर कार्यरत फायर फाइटर्स संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं और उनका मासिक मानदेय अब तक दस हजार रुपए से कम है। कई फायर फाइटर्स 15 साल से ठेके पर कार्यरत हैं। बाईस गोदाम फायर स्टेशन पर फायर फाइटर्स ने मांगों को लेकर धरना दिया।
उनका कहना है कि मात्र 9,900 रुपए मासिक मानदेय मिलता है, जबकि राजधानी में 250 से अधिक फायर फाइटर्स ठेके पर कार्यरत हैं। न तो छुट्टी की व्यवस्था है और न ही वेतन सुरक्षा। उपकरणों के नाम पर केवल हेलमेट और गम बूट दिए गए हैं। फायर सूट, ऑक्सीजन मास्क, बीमा और पहचान पत्र तक उपलब्ध नहीं हैं। उनका आरोप है कि जायज मांगें उठाने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। प्रदेशभर में 1,100 से अधिक फायर फाइटर्स ठेके पर काम कर रहे हैं। प्रभावितों का आरोप है कि ठेका कंपनी के इशारे पर प्रशासन उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रहा है।