
जयपुर। विदेशी ठगों की भी नजर राजधानी के लोगों के खातों पर हैं। लोगों के पास अचानक पैसे निकलने के संदेश आ जाते हैं। जब पीडि़त पता करता है, तब उसे पता चलता है उनका पैसा विदेश में बैठे ठगों ने निकाल लिए हैं। यह सब हो रहा है एटीएम कार्ड के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल के कारण। अधिकांश लोगों को पता ही नहीं होता कि उनके कार्ड का अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल चालू है।
इसी का फायदा ठग उठाते हैं। वे लोग अधिक शिकार होते हैं, जिनके पास वीजा और मास्टरकार्ड हैं। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि देश में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने के लिए कार्ड नंबर, एक्सपायरी तिथि, कार्ड सत्यापन प्रमाण(सीवीवी) और ओटीपी की जरूरत होती है। विदेशों की बात करें, तो वहां सिर्फ कार्ड नंबर और एक्सपायरी डेट और सीवीवी से ही लेनदेन हो जाता है।
यों जा रही जानकारी बाहर:
जब भी व्यक्ति किसी गैर भरोसेमंद वेबसाइट पर लेनदेन करने के लिए कार्ड की जानकारी डालकर ‘रिमेम्बर डिटेल्स ऑप्शन’ पर क्लिक करता है, तो डेटाबेस में कार्ड की जानकारी संग्रहित (सेव) हो जाती है। डेटाबेस के सुरक्षाचक्र को तोडक़र लोगों का विवरण निकाला जाता है। जय अम्बे नगर निवासी कमलकांत त्यागी ने क्रेडिट कार्ड लिया था। जर्मनी से 4500 अमरीकन डॉलर यानी 3.30 लाख रुपए निकलने का संदेश आया। बैंक ने फोन कर इसकी जानकारी दी। 10 अगस्त को बैंक की और से क्रेडिट कार्ड का पिन बदलने का संदेश आया।
शिक्षा विहार जगतपुरा निवासी रोहित गोठेचा को रात 10.15 बजे ई-मेल आया। अगले दिन सुबह उठकर मेल देखा तो उसमें सिटी बैंक से 800.18 यूएसडी(55000 रुपए) ट्रांजेक्शन हुआ। पीडि़त के पास क्रेडिट कार्ड था फिर भी खाते रुपए निकल गए। पीडि़त ने तुरंत कार्ड ब्लॉक करवाया। सिविल लाइन निवासी प्रणय ने वेबसाइट पर यूएसए का टिकट बुक करवाया। एयरलाइंस ने सूचित किया कि उसकी दिल्ली से लंदन जाने वाली फ्लाइट एक घंटे देरी से उड़ेगी। उसने वेबसाइट पर शेड्यूल बदलने के लिए ई-मेल किया। कुछ देर बाद पीडि़त के पास एक कॉल आया उसने कहा कि आपको कुछ रुपए जमा करवाने होंगे ताकि यूके का वीजा दे सकें। इस पर व्यक्ति ने एक लिंक भेजा। लिंक को भरते ही पीडि़त के खाते से दो लाख रुपए कट गए।