जयपुर

2000 आधार कार्ड और 18 लाख भारतीयों का डाटा लीक

साइबर चोरी: डार्क वेब पर फिर जानकारी लीक

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May 27, 2020
2000 आधार कार्ड और 18 लाख भारतीयों का डाटा लीक

नई दिल्ली. लॉकडाउन के साथ देश में साइबर चोरी भी जोरों पर है। 24 घंटे के अंतराल से दो बड़े साइबर चोरी के केस सामने आए हैं। पहले मामले में 2000 आधार कार्ड और दूसरे मामले में 18 लाख भारतीयों की व्यक्तिगत जानकारी सेंधमारी करने के बाद लीक हुई है।
यह खुलासा अमरीका की साइबर इंटेजिलेंस फर्म 'साइबल इनÓ ने किया है। यह वही एजेंसी है जो तीन दिन पहले नौकरी की तलाश करने वाले 2.9 करोड़ भारतीयों के डाटा लीक करने
वाले साइबर चोरों को पकडऩे में लगी हुई है।
साइबल इंक के संस्थाक बीनू अरोड़ा के अनुसार 24 घंटे पहले ही 'डार्क वेबÓ पर आधार कार्ड से जुड़ी 2000 फाइलें डाली गई हैं। डार्क वेब इंटरनेट का ही एक भाग है, लेकिन इसे सर्च इंजन की मदद से नहीं खोजा जा सकता। इस तरह की वेबसाइट को ओपन करने के लिए विशेष ब्राउजर की आवश्यकता होती है।
बीनू अरोड़ा का कहना है कि हमें नहीं पता यह जानकारियों कैसे लीक हुई हैं, लेकिन यह किसी जानकार अपराधी का काम है। 2000 आधार कार्ड में से अधिकांश 2019 के हैं। लीक फाइलों में आधार कार्ड की तस्वीरें हैं जो मोबाइल कैमरे से लेकर वाट्सऐप के माध्यम से ट्रांसफर की गई हैं। ऐसा लगता है कि जो सूचनाएं लीक की गई हैं वो एक छोटा सा हिस्सा है।
मप्र के लोगों का डाटा लीक
अरोड़ा ने बताय कि जब हम 2.9 करोड़ डाटा लीक की जांच कर रहे थे तब हमें पता चला कि डार्क वेब पर आधार के अलावा 19 मई को मध्यप्रदेश के 18 लाख रहवासियों का डाटा भी लीक किया गया है। केंद्र और राज्य की साइबर एजेंसियों ने इस पर जांच शुरू कर दी है। साइबल इंक के शोधकर्ताओं को एक गुमनाम व्यक्ति ने बताया है कि जो 2.9 करोड़ डाटा लीक हुआ है वे एक असुरक्षित टूल का परिणाम है, जो इंटरनेट पर विस्तृत रूप से डाटा कलेक्ट करता है।
विदेशी जमातियों पर आरोपपत्र पेश
नई दिल्ली. तबलीगी मरकज केस में दिल्ली पुलिस ने 83 विदेशी जमातियों के खिलाफ साकेत कोर्ट में 20 पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है। दरअसल, बिना किसी आरोप पत्र के विदेशियों को देश में रोका नहीं जा सकता।

Published on:
27 May 2020 12:27 am
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