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‘सचिन पायलट को मैंने मंत्री बनाया’, अशोक गहलोत ने कहा- अगर वे बोले देते तो दिल भर जाता

अशोक गहलोत ने कहा है कि मैंने सचिन पायलट को मंत्री बनाया लेकिन उन्होंने कभी अपने मुंह से इस बात को कहा नहीं, यहां तक की अपने दोस्तों से भी नहीं कहा, जबकि वे जानते थे। उन्होंने मुझसे फोन करके रिक्वेस्ट किया था। तब मैनें उनके केंद्रीय मंत्री के लिए बात की थी।

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जयपुर

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Kamal Mishra

Jun 07, 2026

ashok gehlot and sachin pilot

अशोक गहलोत और सचिन पायलट (फोटो-पत्रिका नेटवर्क)

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर कांग्रेस नेता सचिन पायलट को लेकर बड़ा बयान दिया है। इस बार गहलोत ने पायलट के केंद्रीय मंत्री बनने के पुराने घटनाक्रम का जिक्र करते हुए दावा किया कि उन्होंने स्वयं उनकी मदद की थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि सचिन पायलट ने कभी सार्वजनिक रूप से इसका उल्लेख नहीं किया। यहां तक कि उन्होंने अपने दोस्तों से भी यह बात नहीं कही।

कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और नेताओं के बीच संबंधों पर चर्चा करते हुए गहलोत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सभी नेताओं को बहुत कुछ दिया है और सभी को संगठन के लिए मिलकर काम करना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने सचिन पायलट के साथ अपने पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया।

फोन करके किया था रिक्वेस्ट- गहलोत

अशोक गहलोत ने कहा कि जब सचिन पायलट को केंद्रीय मंत्री बनाए जाने की चर्चा चल रही थी, तब उन्होंने खुद उनकी मदद की थी। उनके अनुसार पायलट ने उनसे फोन पर संपर्क कर सहयोग मांगा था। गहलोत का दावा है कि उन्होंने संबंधित स्तर पर बात की और बाद में पायलट मंत्री बने। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी सचिन पायलट को भी है। गहलोत ने कहा कि मैंने उनको फोन करके बता भी दिया था कि आपके मंत्री के लिए मैंने बात कर ली है।

गहलोत बोले- मुझे इस बात हमेशा शिकायत रही

पूर्व मुख्यमंत्री ने भावुक अंदाज में कहा कि उन्हें इस बात की शिकायत हमेशा रही कि सचिन पायलट ने कभी खुलकर यह नहीं कहा कि गहलोत ने उनकी मदद की थी। उन्होंने कहा कि यदि पायलट अपने साथियों या समर्थकों के बीच भी यह स्वीकार कर लेते कि उन्हें राजनीतिक जीवन में अशोक गहलोत का सहयोग मिला था, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से खुशी होती। 'मेरा दिल भर जाता।'

सहयोग को स्वीकार करना चाहिए- गहलोत

गहलोत ने कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी के सहयोग या योगदान को स्वीकार करने में संकोच नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार आज भले ही दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद रहे हों, लेकिन अतीत में उन्होंने पायलट के लिए सकारात्मक भूमिका निभाई थी।

मुझे अब पद की लालसा नहीं- गहलोत

गहलोत ने यह भी कहा कि अब उन्हें किसी पद की लालसा नहीं है। तीन बार मुख्यमंत्री रहने के बाद वह खुद को संतुष्ट राजनेता मानते हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं और अब उनकी प्राथमिकता संगठन को मजबूत देखना है।

पार्टी नेताओं को एकजुट होने का दिया संदेश

कांग्रेस की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए गहलोत ने नेताओं से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश और पार्टी दोनों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं और ऐसे समय में व्यक्तिगत विवादों से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है। गहलोत ने कहा कि राजस्थान कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत को पार्टी नेतृत्व भी अच्छी तरह समझता है और यही कारण है कि प्रदेश इकाई को हमेशा विशेष महत्व मिला है।