दिल्ली सरकार ने Delhi High Court को सूचित किया है कि उसने baby feeding rooms के निर्माण के लिए एक policy का मसौदा तैयार किया है और इसे लेकर आम जनता से सुझाव मांगे हैं।
जयपुर. दिल्ली सरकार नई मांओं को लेकर फिक्रमंद दिखाई दे रही है। ऐसे में सरकार के वुमन एंड चाइल्ड डवलपमेंट डिपार्टमेंट ने ग्लोबल ट्रेंड को अपनाते हुए देश की राजधानी में ब्रेस्टफीडिंग और चाइल्ड केयर सेंटर बनाने की संभावना तलाशना शुरू कर दिया है।
दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को सूचित किया है कि उसने बच्चे को स्तनपान कराने वाले कक्ष के निर्माण के लिए एक नीति का मसौदा तैयार किया है और इसे लेकर आम जनता से भी टिप्पणी और सुझाव मांगे हैं। सुझाव के लिए मसौदा नीति को संबंधित विभागों के साथ भी शेयर किया जा चुका है।
इन विभागों से ली जा चुकी है सलाह
नई मांओं और नन्हे शिशुओं के लिए तैयार किए जा रहे ड्राफ्ट को लेकर नई दिल्ली, दक्षिण दिल्ली नगर निगमों, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), महिला एवं बाल विभाग और शहरी विकास विभाग जैसे संगठनों के साथ परामर्श पहले ही हो चुका है।
ये है योजना
देश की राजधानी में विकसित देशों की तर्ज पर बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराने के लिए कमरे बनवाए जाएंगे। वहां ऐसा माहौल होगा, जो आरामदायक होने के सथ ही सुरक्षित भी होगा।
अदालत से हस्तक्षेप की मांग
बता दें कि दिल्ली सरकार ने नौ महीने के अवयान की मां नेहा रस्तोगी व वकील अनिमेष रस्तोगी के माध्यम से दायर एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट को दिए हलफनामे में कहा कि इसका उद्देश्य जनोपयोगी विभागों और अन्य के लिए स्तनपान कराने वाली माताओं और उनके बच्चे के लिए फैसिलिटी स्थापित करने के संबंध में दिशानिर्देश तैयार करना है।
याचिका में स्तनपान कराने वाली माताओं और उनके बच्चों को पर्याप्त सुविधाएं प्रदान करने के लिए अदालत के हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
ये हैं दिल्ली सरकार के सुझाव
-एक आदर्श नसिंर्ग रूम ग्राउंड फ्लोर पर होना चाहिए जिसमें सिंक, मिरर आदि होना चाहिए।
-डायपर बदलने की सुविधा और वाशरूम होना चाहिए।
कमरे का आकार पर्याप्त होना चाहिए और दिव्यांगो ंसहित सभी के लिए आसानी से सुलभ होना चाहिए।
-अवांछित लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए एक महिला परिचर को बाहर तैनात किया जा सकता है।
-एक आपात बटन / इमरजेंसी अलार्म भी होना चाहिए।
-एक अलग कमरे के लिए जगह की अनुपलब्धता के मामले में माताओं की निजता के लिए नसिंर्ग एरिया को पर्दे से ढका जा सकता है या फ्लेक्स दीवारों के साथ कवर करना चाहिए।
नीति के कुछ मुख्य बिंदु -
-बच्चे के पोषण के लिए मां के जैविक और प्राकृतिक अधिकार को सुनिश्चित करना।
-नर्सिग कक्ष सभी बस टर्मिनलों और डिपो, रेलवे स्टेशनों, प्रमुख मेट्रो स्टेशनों, अदालत परिसर, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सरकारी और निजी वाणिज्यिक भवनों, सिनेमा हॉल, डिपार्टमेंटल स्टोर और मॉल में स्थापित किए जाए।
-चाइल्डकेयर रूम तक आसानी से पहुंच सकने के लिए उस जगह के पास साइन बोर्ड भी हो।
जयपुर की महिलाओं ने भी ठहराया उचित
दिल्ली सरकार के इन प्रयासों को लेकर जयपुर की महिलाओं ने भी दिलचस्पी दिखाई। खासतौर पर नई मांओं ने, वे कहती हैं कि अब हमारा देश में भी ऐसी सुविधाएं और माहौल होना ही चाहिए, जिससे नई मांओं के लिए बाहर निकलना आसान हो।
आजकल न्यूक्लियर फैमिली का जमाना है, ऐेसे में अपने नन्हे बच्चे को साथ रखना पड़ता है, लेकिन बाजारों में ऐसी कोई सुविधा नहीं होती। अगर दिल्ली में यह सफलता से लागू हो सका, तो जयपुर में भी ऐसी पहल जरूर शुरू की जानी चाहिए।