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Bधारवाड़.B लखमनहल्ली-कलघटगी रोड स्थित श्रीक्षेत्र सोमेश्वर शिव मंदिर धारवाड़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। प्राचीन परंपराओं से जुड़े इस शिवालय में वर्षभर श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। महाशिवरात्रि पर यहां आस्था का सैलाब उमड़ता है, वहीं मकर संक्रांति के अवसर पर होने वाले रथोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। शांत प्राकृतिक वातावरण, प्राचीन स्थापत्य और धार्मिक अनुष्ठान मंदिर को विशेष बनाते हैं।B
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Bरोजाना सैकड़ों श्रद्धालु करते हैं दर्शनB
मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं। भक्त जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। श्रावण मास में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। मंदिर समिति की ओर से प्रत्येक सोमवार और शनिवार सुबह 9 से दोपहर 2.30 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी की व्यवस्था की जाती है।B
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Bमकर संक्रांति पर निकलती है शोभायात्राB
हर साल 14 और 15 जनवरी को मकर संक्रांति उत्सव मनाया जाता है। 15 जनवरी को होने वाले विशेष रथोत्सव में विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। महाशिवरात्रि पर विशेष पूजन, रुद्राभिषेक, उपवास और रात्रि जागरण होता है। इस दौरान मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं।B
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Bकार्तिक में दीपों से जगमगा उठता है परिसरB
कार्तिक मास में मंदिर परिसर में विशेष दीपोत्सव आयोजित किया जाता है। हजारों दीपों की रोशनी और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा परिसर भक्तिमय हो उठता है। इस दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
Bपत्थरों में दिखती है प्राचीन स्थापत्य की झलकB
मंदिर के निर्माण को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक मान्यताएं प्रचलित हैं। स्थानीय परंपराएं इसे प्राचीन काल से जोड़ती हैं, जबकि उपलब्ध ऐतिहासिक विवरण इसे चालुक्यकालीन स्थापत्य परंपरा से संबंधित बताते हैं। मंदिर की पत्थर की संरचना, महिषासुरमर्दिनी और चतुर्भुज गणपति की प्रतिमाएं इसकी ऐतिहासिक और कलात्मक विरासत को दर्शाती हैं। मंदिर के समीप स्थित जलाशय को शाल्मला नदी के उद्गम क्षेत्र से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक आस्था के साथ यह स्थल इतिहास और प्रकृति से जुड़े होने के कारण भी श्रद्धालुओं और आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र है।
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Bपूजा-पाठ से गूंजता है मंदिर परिसरB
प्रात: और सायंकाल पूजा, अभिषेक, आरती, रुद्रपाठ तथा भजन-कीर्तन से मंदिर परिसर आध्यात्मिक वातावरण में डूबा रहता है। हरियाली और शांत प्राकृतिक परिवेश के बीच स्थित श्रीक्षेत्र सोमेश्वर मंदिर धारवाड़ की धार्मिक आस्था के साथ उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है।B
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B- बसय्या संगय्या बल्लारिमठ स्वामी, प्रमुख, शिवालय। B
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