जयपुर। राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आईएचएमआईएस सॉफ्टवेयर के फार्मेसी मॉडल को 25 जनवरी तक अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में […]
जयपुर। राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आईएचएमआईएस सॉफ्टवेयर के फार्मेसी मॉडल को 25 जनवरी तक अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में विभाग ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को आदेश जारी किए गए हैं।
इसका उद्देश्य मरीजों की आभा आईडी से लिंक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करना है, जिससे इलाज का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित और सुलभ रहे। पहले चरण में जिला चिकित्सालय, उप-जिला चिकित्सालय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर यह व्यवस्था लागू की जा चुकी है। अब अगले चरण में सभी पीएचसी को इसके दायरे में लाया जा रहा है। 100 से कम ओपीडी रजिस्ट्रेशन और दवा पर्ची एंट्री का काम मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के ऑपरेटर से करवाया जाएगा। विभाग का दावा है कि इससे दवा वितरण में पारदर्शिता आएगी, स्टॉक प्रबंधन बेहतर होगा और फर्जी या दोहरी एंट्री पर रोक लगेगी। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस डिजिटल पहल से मरीजों को तेज, सटीक और रिकॉर्ड आधारित स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी, वहीं सरकार को दवा आपूर्ति और उपयोग का रियल-टाइम डेटा भी उपलब्ध होगा।