जयपुर

संपादकीय:’भारत टैक्सी’ ने दिखाई सहकारिता में नई किरण

वस्तुत: कई क्षेत्र हैं जहां सहकारिता मॉडल न केवल संभव है, बल्कि बेहतर हो सकता है। वर्तमान में ई-कॉमर्स बाजार पर कुछ वैश्विक कंपनियों का एकाधिकार है।

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Feb 08, 2026

भारत में सहकारिता आधारित टैक्सी सेवा की शुरुआत दुनिया के लिए एक ऐसी क्रांतिकारी गूंज है, जिसकी अनुगूंज अन्य क्षेत्रों में सुनाई पड़ सकती है। निश्चित ही यह 'ओला' और 'उबर' जैसी निजी स्वामित्व में चलने वाली ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को चुनौती देगी। अच्छी बात यह है कि सहकार से संचालित होने के कारण 'भारत टैक्सी' सेवा में बिचौलिया कंपनियों का मुनाफा शामिल नहीं होगा, जिससे यात्रियों और टैक्सी ड्राइवरों दोनों को फायदा होगा। इससे सेवा सस्ती तो होगी ही, करीब-करीब पूरा किराया चालकों की जेब में जाएगा जबकि, निजी कंपनियां 30-40 फीसदी किराया अपने पास रखती हैं। भारत टैक्सी का संचालन 'सहकार टैक्सी को-ऑपरेटिव लिमिटेड'(एसटीसीएल) नामक बहुराज्यीय सहकारी संगठन करेगी, जिसमें टैक्सी चालक शेयर होल्डर होंगे। इस ऐप से जुड़ते ही चालक को कम से कम पांच शेयर मिलेंगे, जिनकी कीमत मात्र 500 रुपए होगी। कार चालकों को प्रतिदिन मात्र 30 रुपए और ऑटोरिक्शा चालकों को 18 रुपए का सब्सक्रिप्शन चार्ज देना होगा। सरकार ने वर्ष 2029 तक देशभर में 'भारत टैक्सी' सेवा शुरू करने का संकल्प जताया है।
'भारत टैक्सी' की सफलता इस पर निर्भर होगी कि संचालन कितनी बखूबी और पेशेवर तरीके से किया जा रहा है। सहकारी संगठनों के सामने ऐतिहासिक रूप से प्रबंधन और पारदर्शिता की चुनौतियां रही हैं। लेकिन आज हमारे पास 'ब्लॉकचेन' और 'रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स' जैसी तकनीकें हैं। 'भारत टैक्सी' की सफलता इस बात पर भी टिकी है कि उसका ऐप उतना ही सुचारू हो जितना किसी निजी कंपनी का। यदि हम तकनीक का इस्तेमाल लोकतांत्रिक तरीके से करें तो सहकारिता का प्रबंधन भ्रष्टाचार मुक्त और कुशल हो सकता है। देश में सहकारिता का इतिहास दूध व पापड़ उद्योग में सफलता की कहानियों से भरा पड़ा है। यह भी सच है कि देश में सहकारिता कमोबेश कृषि और डेयरी क्षेत्रों तक सीमित रही है जबकि, इसके विस्तार की काफी गुंजाइश है। मोदी सरकार ने पहली बार अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन व उसकी जिम्मेदारी अमित शाह जैसे कद्दावर नेता को देकर अपने इरादे जरूर जाहिर किए थे।


वस्तुत: कई क्षेत्र हैं जहां सहकारिता मॉडल न केवल संभव है, बल्कि बेहतर हो सकता है। वर्तमान में ई-कॉमर्स बाजार पर कुछ वैश्विक कंपनियों का एकाधिकार है। यदि एमएसएमई का अपना एक सहकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म हो, तो वे विज्ञापनों और कमीशन के बोझ से मुक्त होकर उपभोक्ताओं को सस्ता सामान उपलब्ध करा सकेंगे। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के इस दौर में, समुदाय-आधारित सौर ऊर्जा सहकारी समितियां क्रांतिकारी कदम हो सकती हैं। एक हाउसिंग सोसाइटी या पूरा गांव मिलकर सौर पैनल लगा सकता है और उत्पादित बिजली का उपयोग करने के बाद अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर सामूहिक आय अर्जित कर सकता है।

Published on:
08 Feb 2026 02:10 pm
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