हर माह के शुक्लपक्ष और दूसरी कृष्ण पक्ष की 11 वीं तिथि को एकादशी कहते हैं। सनातन धर्म में एकादशी का बहुत महत्व है। एकादशी को भगवान विष्णु का दिन कहा जाता है। स्कन्द पुराण में एकादशी व्रत का महत्व बताते हुए कहा गया है इस व्रत के प्रभाव से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। एकादशी व्रत कई यज्ञों के समान फल देता है।
जयपुर. सन 2021 प्रारंभ हो चुका है। धार्मिक और ज्योतिषीय नजरिए से इस साल की अलग ही अहमियत है। इस बार के केलेंडर में एकादशी तिथि ज्यादा है। आमतौर पर एक साल में 24 एकादशी तिथियां आती हैं पर इस बार एक तिथि ज्यादा होने से 24 की जगह 25 एकादशी व्रत किए जाएंगेै। गौरतलब है कि सनातन धर्म में एकादशी का बहुत महत्व है। एकादशी को भगवान विष्णु का दिन कहा जाता है। स्कन्द पुराण में एकादशी व्रत का महत्व बताते हुए कहा गया है इस व्रत के प्रभाव से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं।
एकादशी व्रत कई यज्ञों के समान फल देता है। हर माह के शुक्लपक्ष और दूसरी कृष्ण पक्ष की 11 वीं तिथि को एकादशी कहते हैं। एक महीने में आमतौर पर 2 एकादशी व्रत आते हैं और इस तरह एक साल में 24 बार एकादशी आती हे। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि कभी-कभी एक अंग्रेजी महीने में 3 बार एकादशी तिथि पड़ जाती है। पंचांग गणना की वजह से यह स्थिति बनती हैै। पिछले साल भी यही स्थिति बनी थी जब अधिकमास के कारण जुलाई में 3 एकादशी आई थीं।
साल की सभी 24 एकादशी तिथियों को अलग-अलग नाम दिए गए हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार इन्हीं में सफला एकादशी भी एक है जोकि पौष कृष्ण पक्ष को पड़ती है। इस साल यानि 2021 की पहली एकादशी 9 जनवरी को है। इस दिन सफला एकादशी मनाई जाएगी। खास बात यह है कि 2021 की अंतिम एकादशी के रूप में भी सफला एकादशी मनाई जाएगी। 2021 के दिसंबर माह की 30 तारीख को सफला एकादशी व्रत फिर से किया जाएगा। एक ही साल में दो बार एक ही एकादशी का व्रत किए जाने की यह अनूठी घटना है।