लगातार बिजली संकट से बचने के लिए खोली राह: सरकार बिना रिन्यूएबल एनर्जी वाले प्रोजेक्ट्स को भी देगी अनुमति
जयपुर. हमारे पास बिजली उत्पादन के प्लांट तो हैं, लेकिन बिजली को स्टोर करने की व्यवस्था नहीं है। इससे ज्यादा बिजली उत्पादन होने पर उसे सस्ते दाम में भी बेचने की नौबत आती रही है और संकट में बिजली नहीं मिल पा रही। अब राजस्थान पानी में बिजली स्टोरेज के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू कर रहा है। ऐसे 7 हजार मेगावाट के प्रोजेक्ट प्रदेश में लगेंगे। इसके लिए फिलहाल 8 जगह चिह्नित कर ली गई हैं।
अक्षय ऊर्जा निगम के कहने पर जल संसाधन विभाग ने पानी के आवंटन का प्रस्ताव भी बना लिया है और दस दिन में रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएगा। जब भी बिजली की जरूरत होती, तब पम्प स्टोरेज प्रोजेक्ट के जरिए बिजली बना ली जाएगी। इससे बिजली संकट से भी राहत मिलने की उम्मीद आगे बढ़ी है। अभी तक ऐसे एक ही प्रोजेक्ट के लिए एमओयू हुआ था, लेकिन पिछले तीन साल से वह भी खटाई में रहा।
अभी यह हो रहा
सोलर व विंड एनर्जी को ग्रिड में भेजा जाता है। यदि ज्यादा बिजली बनती है तो डिस्कॉम्स को पहले उसी बिजली को सप्लाई करना जरूरी होता है, क्योंकि इसे स्टोरेज नहीं किया जा सकता। ऐसे में थर्मल पावर प्लांट से बिजली उत्पादन रोकना पड़ता है। प्लांट बंद करने और फिर शुरू करने में अतिरिक्त खर्चा बढ़ जाता है।
इस तरह बिजली होगी स्टोर...
पंप स्टोरेज के रूप में प्रोजेक्ट।
स्टोरेज भी बैट्री में नहीं बल्कि पानी में होगा और जरूरत पड़ने पर इस बिजली का उपयोग कर सकेंगे।
बांध, जलाशय के नजदीक पहाड़ी पर जलाशय (तालाब) बनाए जाएंगे। एक नीचे और दूसरा ऊपर होगा। दोनों जलाशय में पानी भरा जाएगा। यहीं टरबाइन लगाया जाएगा।
सोलर व विंड प्लांट से मिलने वाली बिजली को स्टोरेज सिस्टम में लगाया जाएगा। यहां टरबाइन के जरिए पानी को ऊपर की ओर पंप करेंगे और बिजली वहां पानी में स्टोरेज हो जाएगी। जब उसी बिजली की जरूरत पड़ेगी तो पानी को वापस टरबाइन के जरिए नीचे वाले जलाशय में लाएंगे। इस प्रक्रिया से बिजली मिलेगी, जिसे डिस्कॉम्स या अन्य को सप्लाई किया जा सकेगा।
रात में सौर ऊर्जा का उत्पादन नहीं होता है, इसलिए जहां भी बिजली की जरूरत होगी तो ग्रिड से लेने की बजाय स्टोरेज ऊर्जा का उपयोग किया जा सकेगा।
ये कंपनियां प्रोजेक्ट लगाने के लिए आईं...
रिन्यू एनर्जी, ग्रीनको, एसीएमई, टोरेंट, जेएसडब्ल्यू, वेलस्पन व अन्य।
इन जिलों में लगेंगे प्रोजेक्ट
टोंक, प्रतापगढ, बूंदी, बांसवाडा, उदयपुर, सिरोही।