
Jaipur News: जयपुर के नाहरगढ़ के जंगल में लापता हुए दो भाइयों की वह त्रासदी आज भी शास्त्री नगर के एक परिवार को हर पल साल रही है। 25 वर्षीय राहुल और उसके छोटे भाई आशीष बीते साल एक सितंबर को जंगल में भटक गए थे। अगले दिन आशीष का शव मिला लेकिन राहुल का अब तक कोई सुराग नहीं मिला।
एक साल बीत चुका है, पर मां-बाप की आंखें आज भी घर के दरवाजे पर टिकी रहती हैं। मां सीता देवी की आंखों से आंसू थमते ही नहीं। वे कहती हैं, “जी तो रहे हैं, पर हर दिन दर्द के साथ। लगता है जैसे दरवाजा खुलेगा और राहुल लौट आएगा।” पिता सुरेश चंद शर्मा टूटे स्वर में कहते हैं, “बेटे की अनुपस्थिति ने हमें अंदर तक तोड़ दिया है। पुलिस कहती है तलाश जारी है, पर कैसे? यह हमें कभी नहीं बताती।”
परिजन ने बताया कि 16 अगस्त को नाहरगढ़ जंगल में एक कंकाल मिला था। पुलिस ने दावा किया कि यह राहुल का हो सकता है और डीएनए जांच की बात कही। लेकिन परिवार इसे मानने को तैयार नहीं। परिजन कहते हैं, “राहुल की लंबाई साढ़े पांच फीट से भी कम थी जबकि मिले कंकाल की ऊंचाई करीब छह फीट है। कपड़े भी अलग हैं। फिर कैसे मान लें कि यह राहुल है?” रिश्तेदार अनिल शर्मा का आरोप है कि इतने बड़े हादसे के बावजूद अब तक सरकार ने परिवार को किसी भी प्रकार की सहायता राशि उपलब्ध नहीं करवाई है।
परिवार याद करता है कि उस दिन को जब दोनों भाई नाहरगढ़ के चरण मंदिर से लौट रहे थे। अचानक आशीष ने घर फोन कर कहा, “भाई राहुल जंगल में कहीं गुम हो गया है… मिल नहीं रहा डर लग रहा है।” यह उसकी आखिरी आवाज थी। कुछ ही देर बाद उसका मोबाइल भी बंद हो गया।
पुलिस, परिजन, सिविल डिफेंस और स्थानीय लोगों ने मिलकर जंगल में लगातार सर्च किया। हेलीकॉप्टर से भी खोजबीन हुई। अगले दिन आशीष का शव मिल गया लेकिन राहुल का कोई पता नहीं चला। उसकी अंतिम लोकेशन भी आशीष के शव से मात्र 50 मीटर दूर दर्ज हुई थी।
प्रशासन और पुलिस की खोजबीन धीरे-धीरे ठंडी पड़ गई। जांच में यह आशंका जताई गई कि भाइयों में झगड़ा हुआ होगा राहुल ने आशीष को धक्का दिया और फिर खुद कहीं भाग गया। लेकिन यह परिजन को गले नहीं उतरता। एक साल बीत जाने के बाद भी राहुल की तस्वीर घर की दीवारों पर टंगी है और मां-बाप की उम्मीदें दरवाजे पर। सवाल वही हैं, जवाब कोई नहीं।