
भवनेश गुप्ता
जयपुर। महंगी बिजली से राहत देने के लिए पड़ौसी राज्य सक्रिय हैं, लेकिन राजस्थान में जनता पर बिजली बिल बढ़ोत्तरी का बोझ लादा जा रहा है। हरियाणा और गुजरात ने फ्यूल सरचार्ज में छूट देकर नजीर पेश की है। हरियाणा सरकार ने 37 पैसे और गुजरात में 19 पैसे प्रति यूनिट की राहत दी, लेकिन राजस्थान में उलटे 16 पैसे यूनिट फ्यूल सरचार्ज का भार बढ़ा दिया। यहां दोनों सरकारों में फ्यूल सरचार्ज लगाते रहे। सत्ताधारी कांग्रेस के मौजूदा कार्यकाल में अब तक फ्यूल सरचार्ज के रूप में औसतन 42 पैसे प्रति यूनिट का अतिरिक्त भार डाला जा चुका है। सवाल यह है कि जब दोनों राज्यों की सरकारें फ्यूल सरचार्ज से राहत देने का मैकेनिज्म ला सकती है तो राजस्थान में ऐसा क्यों नहीं हो सकता। नौकरशाह और नेता दोनों केवल सब्सिडी की रेवड़ी बांटने में व्यस्त है।
1. हरियाणा : 37 पैसे यूनिट की छूट
हरियाणा सरकार ने फ्यूल सरचार्ज में 37 पैसे यूनिट की छूट देकर 70.46 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत इससे जनता की जेब से 100 करोड़ रुपए निकलने से बच गए।हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने खुद बिजली कंपनियों के साथ इसकी समीक्षा की। इसकेे पीछे सस्ती बिजली खरीद भी वजह रही, लेकिन राजस्थान इसमें पीछे क्यों।
2. गुजरात : 19 पैसे यूनिट की राहत
सरकार ने पिछले वर्ष ही फ्यूल सरचार्ज में प्रति यूनिट 19 पैसे की कटौती करने का फैसला किया। यह कटौती मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ते कोयले और सस्ती गैस के कारण की गई होने की वजह से की गई। सवाल यह है कि जब गुजरात में अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर आया तो राजस्थान में क्यों नहीं।
राजस्थान में यह हालात : दोनों सरकारों में फ्यूल सरचार्ज का करंट
1. सत्ताधरी कांग्रेस सरकार में
जनवरी से मार्च, 2019- 28 पैसे
अप्रेल से जून, 2019- 47 पैसे
जुलाई से सितम्बर, 2019- 27 पैसे
अक्टूबर से दिसम्बर, 2019- 39 पैसे
जनवरी से मार्च, 2020- 30 पैसे
अप्रेल से जून, 2020- 28 पैसे
जुलाई से सितम्बर, 2020- शून्य
अक्टूबर से दिसम्बर, 2020- 7 पैसे
जनवरी से मार्च, 2021- 16 पैसे
2. पिछली भाजपा सरकार में
वर्ष 2014- 63 पैसे
वर्ष 2015- 6 पैसे
वर्ष 2016- 30 पैसे
वर्ष 2017- 64 पैसे
वर्ष 2018- 30 पैसे
(पैसे प्रति यूनिट है)