जयपुर

प्रदेश में जम्मू कश्मीर से बने फर्जी लाइसेंस से एकत्र किया जा रहा था हथियारों का जखीरा

150 लाइसेंस व सैंकड़ों हथियार बरामद

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जयपुर . एटीएस ने हथियार का अवैध लाइसेंस बनाने और बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर अजमेर निवासी मास्टर माइंड जुबेर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य बिना किसी कागजी प्रक्रिया के पैसे लेकर लाइसेंस बेचते थे। एक लाइसेंस के बदले तीन से चार लाख वसूलते और फिर लाइसेंस लेने वाले को 2007-2008 की बैकडेट का जम्मू कश्मीर का हथियार लाइसेंस बनाकर देते। एसटीएस की 12 टीमों ने अजमेर, जम्मू कश्मीर, पंजाब व मध्यप्रदेश में दबिश देकर अभी गिरोह से करीब 150 फर्जी लाइसेंस बरामद किए है। वहीं सैंकड़ों हथियार भी जब्त किए है। गिरोह हथियार लाइसेंस के लिए पुलिस सत्यापन नहीं करवाते। गिरोह ने कई अपराधियों के भी फर्जी हथियार लाइसेंस बनाकर उनको हथियार मुहैया करवाए हैं।

इधर टीम गठित, उधर शिकायत पहुंची
एटीएस के एडीजी उमेश मिश्रा ने बताया कि करीब चार माह पहले सूचना मिली थी कि एक संगठित गिरोह हथियार का फर्जी लाईसेंस बनाने का कारोबार कर रहा है और हथियार भी उपलब्ध करवाता है। एटीएस आईजी बीजू जॉर्ज जोसफ और एसपी विकास कुमार के निर्देशन में टीम का गठन किया गया। इसी बीच उदयपुर निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत दी कि अजमेर निवासी जुबेर ने लाइसेंस बनाने और हथियार देने के नाम पर उससे 12 लाख रुपए ले लिए। लेकिन वे उसे संदिग्ध लग रहे है।

एटीएस टीम ग्राहक बनकर पहुंची

एटीएस टीम ने अजमेर निवासी जुबेर को बोगस ग्राहक से लाइसेंस देने की एवज में दो लाख रुपए का चैक, तीस हजार रुपए नकद लेते समय पकड़ लिया। जुबेर से पुलिस ने 55 फर्जी लाइसेंस समेत हथियारों का जखीरा बरामद किया है। जुबेर से पूछताछ के बाद पुलिस ने गिरोह के सदस्य पंजाब निवासी विशाल व जम्मू निवासी राहुल को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने विशाल से 48 और राहुल के पास से 150 फर्जी हथियार लाइसेंस व सैंकड़ों हथियार बरामद हो चुके है। सभी लाइसेंस 2007 और 2008 के बैकडेट में जम्मू कश्मीर से बनाकर दिए गए है।

तीनों आरोपित गन हाउस के मालिक

जुबेर की अजमेर में वली गन हाउस के नाम से दुकान है। यह लाइसेंस निलंबित है। वहीं राहुल का जम्मू और विशाल का पंजाब में गन हाउस है।

अधिकारियों की मिलीभगत की जांच

पुलिस को संदेह है कि इस गिरोह में जम्मू कश्मीर के किसी ना किसी बड़े अधिकारी की मिलीभगत हो सकती है। क्योंकि 2008 के बाद ऑल इंडिया का हथियार लाइसेंस कोई भी राज्य सरकार नहीं दे सकती।

Published on:
11 Sept 2017 11:16 pm
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