
जयपुर. नौ माह पहले मां आरती का किडनी प्रत्यारोपण हुआ और अब 7 वर्षीय बच्चे को भी इस जटिल ऑपरेशन से गुजरना पड़ा। संभवत: वंशानुगत बीमारी ने रुद्राक्ष को किडनी प्रत्यारोपण तक पहुंचा दिया। इतनी कम उम्र में यह प्रत्यारोपण राज्य में संभवत: पहली बार हुआ है। रुद्राक्ष को पिता मनोज गुप्ता की किडनी ही प्रत्यारोपित की गई। पिता ने अपने बेटे को फिर जीवनदान दिया।
दो माह से चल रहा था डायलिसिस
महात्मा गांधी अस्पताल में वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. सूरज गोदारा ने बताया, कोटा निवासी रुद्राक्ष दो माह से डायलिसिस करवा रहा था। उसे बचपन से ही बिस्तर में पेशाब की शिकायत थी। जब वह भर्ती हुआ तो किएटिनिन लेवल बढ़ा हुआ था। किडनी नहीं के बराबर सक्रिय थी व हीमोग्लोबीन बहुत कम था। सांस में परेशानी व भूख कम हो गई थी। किडनी प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. टी सी सदासुखी के अनुसार बच्चों में धमनियों व शिराओं का आकार छोटा होने से ऑपरेशन में मुश्किल होती है।