
जयपुर। सांसद किरोड़ी लाल मीणा के खिलाफ वर्षों पहले दर्ज एफआइआर पर अनुसंधान पूरा नहीं होने के मामले में लोकायुक्त की सिफारिश पर राज्य सरकार ने कार्रवाई रिपोर्ट पेश कर दी है।
अब इस मामले में लोकायुक्त के पास फाइल बंद हो जाएगी और उसका विवरण वार्षिक रिपोर्ट के जरिए विधानसभा में पेश होगा। उधर, पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी सहित अन्य नेताओं के खिलाफ वर्षों से मुकदमे लटके होने का मामला लोकायुक्त और राज्य मानवाधिकार आयोग में अब भी लम्बित है।
पूर्व मंत्री भाटी के खिलाफ 1997 में तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी पी के देब की ओर से दर्ज कराए गए मामले में तो करीब 10 बार जांच भी लगभग पूरी हो चुकी, लेकिन गिरफ्तारी नहीं करनी पड़े इसलिए जांच के लिए अनुसंधान अधिकारी बदलने मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
आयोग में लम्बित मामले : नेताओं के खिलाफ राज्य मानवाधिकार आयोग और लोकायुक्त के पास मामले चल रहे हैं, लेकिन वहां भी अक्सर यह जवाब आता है कि अनुसंधान जारी है। कई बार तारीख बदली, लेकिन जवाब यही आ रहा है। मानवाधिकार आयोग तो एक बार इन मुकदमों के जल्द निस्तारण की आवश्यकता व सुझाव के लिए गृह विभाग को विशेष प्रतिवेदन भी भेज चुका, लेकिन नौ माह तक विभाग में फाइल ही गुम रहने के कारण आयोग अब पुन: मामले में प्रसंज्ञान लेना पड़ा है। उधर, लोकायुक्त के दखल के बाद सांसद किरोड़ी लाल के खिलाफ दर्ज कई मामलों को तो सरकार ने वापस लेकर उनका फैसला करा लिया है।
नहीं मिल रहे भाटी
पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी के खिलाफ चल रहे मामले में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने जयपुर के पुलिस आयुक्त को चालान पेश करने का निर्देश तो दे दिया है, लेकिन भाटी पुलिस को मिल ही नहीं पा रहे हैं। इससे चालान अटका हुआ है। कई और नेता हैं, जिनके खिलाफ चालान पेश होने का इंतजार है।