राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव से हीमोग्लोबिन कम होने के कारण लड़कियों को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव से हीमोग्लोबिन कम होने के कारण लड़कियों को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने हीमोग्लोबिन कम होने के कारण सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के अंतर्गत बीएससी (नर्सिंग) में प्रवेश नहीं देने के मामले में यह टिप्पणी की। साथ ही, कहा कि संविधान में महिलाओं और लड़कियों को शिक्षा का समान अधिकार प्राप्त है और इस अधिकार का हनन किसी भी कारण से नहीं किया जा सकता, चाहे वह स्वास्थ्य कारण ही क्यों न हो।
न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड ने एक मामले में कहा कि लड़कियों को शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराना सरकार और शिक्षण संस्थाओं का दायित्व है, जिसे वे पूरा करें। हाईकोर्ट ने जयपुर की 19 वर्षीय छात्रा के मामले में यह आदेश दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को प्रवेश से वंचित नहीं करने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता का बीएससी (नर्सिंग) पाठ्यक्रम की स्क्रीनिंग में चयन हो गया, लेकिन एनीमिया के कारण उसे मेडिकल में अनफिट घोषित कर दिया। उसने अपील की, जहां 24 घंटे के भीतर मेडिकल बोर्ड ने पुन: परीक्षण किया गया और नतीजा वही रहा। इसको लेकर याचिका दायर होने पर कोर्ट ने रिव्यू मेडिकल बोर्ड का गठन किया, जिसने याचिकाकर्ता को पात्र मान लिया। राज्य सरकार ने कहा कि 18 उम्मीदवारों को अनफिट पाया। ऐसे में अन्य उम्मीदवार प्रभावित होंगे।
एनीमिया स्थायी बीमारी नहीं है। यह अस्थायी रक्त विकार है, जिसकी तीव्रता हर व्यक्ति के लिए भिन्न होती है। मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव सामान्य स्थिति है, जिससे भारत में सालाना 10-15त्न महिलाएं प्रभावित होती हैं। सरकार सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाए।